भाजपा सरकार संविधान की संवैधानिक मूल्यों को भुलाकर,जनरल डायर की बर्बरतापूर्ण दमनकारी नीति अपना रहा है – महेश वासुदेव दुबे।
कांकेर – शिवसेना (यूबीटी) के प्रदेश सचिव महेश वासुदेव दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहां दिल्ली के जंतर मंतर पर देश के भविष्य यानी नीट (neet) परीक्षार्थियों और युवाओं द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया अमानवीय लाठीचार्ज अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा प्रहार है। शिवसेना इस बर्बर कार्यवाही की कड़े शब्दों में भत्सर्ना करता है। देश के लाखों मेधावी छात्रा – छात्राएं बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और भर्ती घोटाले के कारण अपने भविष्य को लेकर चिंतित और आशंकित है। वे पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी न्यायसंगत मांगे सरकार के समक्ष रख रहे थे। ऐसे में, अन्नदाताओं और युवाओं की आवाज सुनने के बजाय, उन पर बल प्रयोग करना, आंसू गैस के गोले छोड़ना और उन्हें जबरन खदेड़ना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहां शिवसेना देश के युवाओं और छात्रों के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं लाठीचार्ज की इस घटना में कई छात्र गंभीर रूप से लहूलुहान होकर घायल हो गए हैं जो की बेहद पीड़ादायक है। जब देश का युवा अपनी जायज मांगों परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों पर सख्त कार्यवाही, और केंद्रीय शिक्षा मंत्री की इस्तीफा को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थें, तब सरकार ने संवाद स्थापित करने के बजाय दमन का रास्ता चुना। लाठियां और गोलियों के दम पर युवाओं की आवाज को दबाने की यह कोशिश तानाशाही रवैयें को दर्शाती है। लोकतंत्र में विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान सरकार ने साबित कर दिया है कि वहां युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की भी हत्या कर रही है। शिवसेना ने राष्ट्रपति से मांग करती है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्यवाही में गंभीर रूप से घायल हुए सभी छात्रों का मुक्त इलाज हो और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएं, नीट और अन्य तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों की पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित की जाएं, छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और प्रशासन पर तुरंत कार्यवाही की जाएं, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें, यदि सरकार ने छात्रों की मांगों को जल्द नहीं माना और अपना दमनकारी रवैया बंद नहीं किया, तो शिवसेना द्वारा आंदोलन को पूरे देश में और अधिक तीव्र किया जाएगा। जिसका संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होंगी ।
