देवनाथ एजेंसी पर लगे आरोपों के बीच किसान का सनसनीखेज खुलासा, कृषि विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
कांकेर पखांजूर – क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी और किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। पहले किसान द्वारा यूरिया की 50 किलो बोरी निर्धारित कीमत से कहीं अधिक दाम पर मिलने, बिल नहीं देने और बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने का आरोप लगाया गया था। इस मामले का वीडियो सामने आने और समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। अब किसान ने एक और गंभीर दावा किया है, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
किसान का आरोप: “ऑफर” बताकर मुफ्त सामग्री दी गई, फिर कार्यालय ले जाकर बयान दिलवाया
किसान ने फोन पर बातचीत में दावा किया कि बाद में दुकानदार ने उसे “ऑफर” का हवाला देते हुए कई सामग्री मुफ्त में दी। किसान का यह भी आरोप है कि उसे कृषि अधिकारी के कार्यालय ले जाया गया, जहां यह समझाया गया कि दुकानदार से अच्छे संबंध बनाए रखें। किसान के अनुसार वहां उसका वीडियो भी बनाया गया और भविष्य में भी मुफ्त सामग्री देने की बात कही गई। साथ ही उसे एक बिल भी उपलब्ध कराया गया।
यदि किसान के ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल अधिक कीमत वसूली तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि जांच को प्रभावित करने के प्रयास जैसे गंभीर सवाल भी खड़े करता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी जांच होना बाकी है।
कृषि विभाग की चुप्पी पर सवाल, जांच के नाम पर इंतजार
इस मामले में स्थानीय कृषि अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने पहले कहा कि “अभी सब मिल गया है, मैं बाहर हूं, बाद में बात करूंगा।” समाचार तैयार होने तक विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी या कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई।
वहीं जिला कृषि अधिकारी जितेंद्र कोमरे ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
खरीफ सीजन में खाद किसानों की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। ऐसे समय यदि निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने, बिना बिल बिक्री, बायोमेट्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं होने तथा बाद में किसान को प्रभावित करने जैसे आरोप सामने आते हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक हो जाती है।
