मोबाइल की लत से दूर बड़े सपने देखने का संदेश दिया गया टूरिज्म कैंप

शिक्षा, संस्कार और स्वप्न का संगम बना कैटलबोड का निःशुल्क पर्यटक शिविर

“स्कूल की पढ़ाई में सबसे बड़ा निवेश” – डॉक्टर अबिनाश मिश्रा ने दिया प्रेरक संदेश

गाँव के बच्चों की नज़र में चमकता सितारा, डॉक्टर और सिपाही बनने का सपना

धमतरी – ग्राम कैटलबोड में आयोजित फ्रीस्टार्ट एवं रेंटल गाइड कैंप केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने वाला प्रेरक सामाजिक अभियान शुरू करना है। साहू समाज बांगर परिषद द्वारा संचालित इस शिविर में शिक्षा, संस्कार, जागरूकता और सामाजिक स्वतंत्रता को एक साथ रखा गया है जिसमें सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी गई है।समापन समारोह में आज अविनाश मिश्रा ने छात्रों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ा निवेश है। आज बच्चों को सही दिशा और अवसर देना ही समाज का सबसे बड़ा दायित्व है।” उन्होंने पालकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें और उन्हें शिक्षा एवं संस्कार की ओर प्रेरित करें।रजिस्ट्रार श्री मिश्रा ने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि आठवीं कक्षा में एक समर कैंप स्थापित किया गया था, जिससे उनके जीवन का “टर्निंग प्वाइंट” बना था। उन्होंने विद्यार्थियों को संघर्ष से सीखने, असफलताओं से डरने के बजाय मजबूत बनने और सफलता मिलने पर प्रस्ताव बनाकर रहने की सीख दी। उनके प्रेरक शब्दों ने बच्चों में और आगे बढ़ने की नई ऊर्जा भर दी।चार साल तक लगातार इस शिविर का संचालन करने वाली ग्रामीण प्रतिभाओं को आशा का केंद्र बनने के लिए भुगतान किया गया। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा दिशानिर्देश, कक्षा 9वीं से 12वीं तक कठिन विषयों का अभ्यास, नैतिक शिक्षा, संगीत प्रशिक्षण और प्रामाणिक उदाहरण जैसे नमूने पूरी तरह से मुफ्त में संचालित किए जा रहे हैं। जिले के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और विशेषज्ञ बिना किसी आतंकवादी के बच्चों को समय देकर उनके भविष्य को संवारने में शामिल कर रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत “मैं हूं गुल्लक अभियान” से हुई, जिसमें आपनचंद साहूकार और रंजीता साहू ने 300 बच्चों को गुल्लक और पेंटिंग किट पीटा की शामिल किया। गुल्लक पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी दृष्टि और सामाजिक सरोकारों को उकेरा में दर्शाया। किसी भी चित्र में नायक बनने का सपना था, तो कहीं डॉक्टर, सैनिक, दोस्त और पर्यावरण रक्षक बनने का विनाश दिखाई दिया। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और पक्षी बचाओ जैसे विषयों पर बच्चों की भावनाओं ने सभी को प्रभावित किया।

नामांकित अबिनाश मिश्रा ने बच्चों के लिए शीर्ष 10 पदक और पुस्तकें प्रदान कीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान बच्चों के सम्मान, उत्साह और बड़े सपनों की चमक स्पष्ट दिखाई दी। इस अवसर पर नामांकित नभ कुमार कोसले उपस्थित थे

कैंप की सबसे बड़ी ताकतें कोचिंग संस्थान। शिक्षक स्वयं के साधन से निःशुल्क अध्यापन कर रहे हैं, जबकि अध्ययन और समाज के सहयोग से बच्चों के लिए स्वल्पाहार, परिवहन और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था की गई है। स्टाफ़ अभ्यारण्य द्वारा निर्मित “कर्म पाठ्यालय” से संबंधित घाटी के गांवों में लगभग एक लाख रुपये मूल्य के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, ग्रामीण छात्रों को बेहतर अध्ययन संसाधन मिल रहे हैं।

यह शिविर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुधार का माध्यम भी बन रहा है। बच्चों और किशोरों को नशा, मोबाइल की लत, स्कूल में पलायन और संस्कार जैसे सामाजिक विकृतियों से दूर रखने के उद्देश्य से हर शनिवार को संस्कार और मूल्य शिक्षा की दीक्षा का आयोजन किया जाता है। वहीं सप्ताह में एक अलग दिन क्षेत्र के विशेषज्ञ छात्रों को वैज्ञानिक अकादमिक दिशानिर्देश दिए जाते हैं। इस वर्ष सेना में वीरता विषय पर आयोजित विशेष सत्र ने युवाओं में देशसेवा के प्रति उत्साह जगाया।

संरक्षण, पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता को भी प्रभावी रूप से जोड़ा गया। पर्यावरण प्रेमी मोहन साहू ने बच्चों को सीड बॉल तैयार करने के लिए प्रेरित किया, जबकि पक्षी प्रेमी मोहन साहू ने गौरैया संरक्षण के लिए मुफ्त घोंसलों का वितरण किया। शिक्षकों द्वारा योग, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।

इस वर्ष सामाजिक विद्यालयों में नशा मुक्ति, जागरूकता, स्वास्थ्य और संस्कार विषयों का भी आयोजन किया गया है। इन सतत प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब कश्मीर में दिखाई दे रहा है, जहां शिक्षा, सामाजिक सुधार और नशामुक्ति को लेकर नया स्वतंत्र विकास हो रहा है।

ग्राम कैटलबोड का यह पर्यटक शिविर आज इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया है कि यदि समाज, प्रशासन और शिक्षक सामूहिक संकल्प लें, तो के बच्चे भी बड़े सपने को साकार करने की क्षमता रखते हैं। यह सबसे पहले न केवल शिक्षा का प्रकाश फैलाया जा रहा है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में छात्रावास, संस्कार और अवशेष भविष्य की नई कहानी भी लिखी जा रही है।