बीजापुर में ‘कागजी सड़कों’ का साम्राज्य, 10 साल से चल रहा खेल
3000 करोड़ से ज्यादा भुगतान संदिग्ध | जमीन पर गायब सड़कें, ऑफिस से गायब फाइलें
ईश्वर सोनी बीजापुर
बीजापुर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े ‘कागजी घोटालों’ में से एक के रूप में उभर रही है।
पूर्व में मीडिया को 2000 करोड़ के सड़को में भरस्टाचार की जानकारी मिली थी लेकिन अब मीडिया को PMGSY के पुख्ता दस्तावेज हाथ लगे जिसके अनुसार लगभग 5500 करोड़ की सड़कों में कंही बिना मापदण्ड के कार्य करते हुए तो कंही बिना कार्य किये ही करोड़ो की राशि डकारने की जानकारी निकली
प्रधानमंत्री की ये PMGSY योजना गांव से गांव सड़को को जोड़ने को लेकर थी लेकिन धरातल में बीजापुर के विभागीय अधिकारियों ने कमीशन खोरी एंव बड़े भरस्टाचार को अंजाम देते हुए बिना सड़क बनाये ही करोड़ो की राशि का बंदरबांट कर लिया , कई ऐसी सड़के है जो कागजो में पूर्ण है पर आज तक गांव सड़क नही पंहुच पाई , गलत लोकेशन में माइल स्टोन लगाकर फर्जीवाड़ा किया गया
पिछले 10 वर्षों में करीब 5500 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है , जिसमें से 3000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हो चुका है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि—
👉 कई सड़कें अधूरी हैं
👉 कई सड़कें अस्तित्वहीन हैं
👉 और कई मामलों में दस्तावेज तक गायब कर दिए गए हैं
*10 साल का खेल: अधिकारी बदले, सिस्टम नहीं*
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि—
EE, SDO और इंजीनियर बदलते रहे
लेकिन भ्रष्टाचार का पैटर्न जस का तस रहा.
पेटी ठेकेदारी के जरिए नियमों को दरकिनार किया गया
यानी यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि संगठित सिस्टमेटिक भ्रष्टाचार है।
*“कम सड़क, पूरा भुगतान” का खेल*
जिले की कई सड़कों में यह पैटर्न साफ दिखता है—
गलगम–भुसापुर: 2 किमी सड़क, भुगतान 7 किमी का | MB गायब
तिमापुर–रेखापल्ली: साठगांठ से अतिरिक्त भुगतान
पोकरम–दुदुम: जमीन पर सड़क नहीं, 54 लाख भुगतान
पुतकेल–पटेलपारा (L061): कागजों में पूर्ण, मौके पर गायब
पिटे तुंगोली एंव बड़े तुंगोली की सड़क जो कि एक ही गांव जाने के लिए महज 300मीटर की दूरी पर दो सड़क बना रही है जिसमे दोनो सड़को को मिलाकर 21 km बताया गया है एंव 16.4km पूर्ण बता दिया गया है जबकि धरातल पर सड़क मात्र 9 km से भी कम नजर आई
इतना ही नहीं, कई मामलों में 0 किलोमीटर पर ही माइलस्टोन लगाकर सड़क पूर्ण दिखा दी गई
*बिना सड़क निर्माण करोड़ो का भुगतान जांच के नाम पर आफिस से दस्तावेज गायब, दो सालों से FIR तक नहीं*
सबसे चौंकाने वाली बात—
कई परियोजनाओं की जैसे गलगम -भुसापुर , रेखापल्ली सड़क मेजरमेंट बुक (MB) और रिकॉर्ड गायब कर दिया गया
शिकायतों के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं
यह सीधे तौर पर सबूत मिटाने और सिस्टम की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
*घटिया निर्माण: खुद विभाग ने तोड़ी पुलिया*
गोरना–मनकेली मार्ग पर बनी पुलिया में—
सीमेंट कम, रेत ज्यादा
गिट्टी की जगह बोल्डर
बनते ही दरारें
मामला सामने आने के बाद विभाग ने खुद पुलिया तोड़ दी, जो भ्रष्ट निर्माण का सबसे बड़ा सबूत है।
*काली मिट्टी की सड़कें, कम ऊंचाई की पुलिया*
मीडिया की पड़ताल एंव ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार उल्लूर — केरपे एंव सफीमरका से बड़ेकाकलेर की
सड़कों में खेत की काली मिट्टी का उपयोग
पुलिया मानक से कम ऊंचाई पर
निर्माण के दौरान ही दरारें आने लगी
ग्रामीणों के अनुसार—
बारिश में पानी पुलिया के ऊपर से बहेगा
सड़कें कटेंगी
बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती हैं
*205 सड़कें बनीं, जांच सिर्फ 23 की*
*रिकॉर्ड के अनुसार—*
कुल सड़कें: 205
जांच: सिर्फ 23
सवाल: बाकी 182 सड़कों की जांच क्यों नहीं?
जांच में शामिल 23 सड़कों की सूची (संक्षेप)
इन सड़कों में कम कार्य कर लाखों से करोड़ों तक भुगतान की खबरे मिल रही है।
इन 23 सड़कों पर नजर डालें तो—
बीरागुड़ा – बड़े सनकनपल्ली
➤ लंबाई: 5 किमी | भुगतान: 28.89 लाख
बासागुड़ा – डल्ला
➤ लंबाई: 12 किमी | भुगतान: 90.53 लाख
तररेम – चिन्नागेलूर
➤ लंबाई: 6 किमी | भुगतान: 28.50 लाख
तिमापुर रोड
➤ लंबाई: 6 किमी | भुगतान: 15.66 लाख
पामेड़ – टेकलर
➤ लंबाई: 7 किमी | भुगतान: 28.19 लाख
सिररकोटा रोड
➤ लंबाई: 4.50 किमी | भुगतान: 12.57 लाख
गुडनुगुर रोड
➤ लंबाई: 8 किमी | भुगतान: 20.64 लाख
कादुलनार रोड
➤ लंबाई: 15 किमी | भुगतान: 52.20 लाख
पदेडा – पेड्डाकोरमा
➤ लंबाई: 3 किमी | भुगतान: 2.87 लाख
चेरपाल – पदमुर
➤ लंबाई: 20 किमी | भुगतान: 1.62 करोड़
बारसूर पल्ली – गोडीयापारा कोशलनार
➤ लंबाई: 14 किमी | भुगतान: 1.04 करोड़
भैरमगढ़ बीजापुर रोड – बड़ेतुंगोली
➤ लंबाई: 8 किमी | भुगतान: 69.48 लाख
कुमडेर रोड
➤ लंबाई: 1.5 किमी | भुगतान: 8.46 लाख
तुशवाल रोड
➤ लंबाई: 13 किमी | भुगतान: 40.78 लाख
पोकरम – दुदुम
➤ लंबाई: 7 किमी | भुगतान: 38.42 लाख
मदपाल रोड
➤ लंबाई: 4.50 किमी | भुगतान: 51.30 लाख
गुदमा – एरामनगी
➤ लंबाई: 15 किमी | भुगतान: 1.28 करोड़
पीतेपाल – तमोड़ी
➤ लंबाई: 5 किमी | भुगतान: 46.69 लाख
बिरियाभूमि – एदेर
➤ लंबाई: 14 किमी | भुगतान: 8.39 लाख
पिटे तुंगोली रोड
➤ लंबाई: 13 किमी | भुगतान: 74.40 लाख
तिमापुर – रेखापल्ली
➤ लंबाई: 25 किमी | भुगतान: 1.76 करोड़
आवापल्ली – कोटापल्ली
➤ लंबाई: 27 किमी | भुगतान: 22 हजार
गलगम – भूसापुर
➤ लंबाई: 10.25 किमी | भुगतान: (एमबी गायब)
कई सड़कों में भुगतान पूरा, लेकिन निर्माण अधूरा या गायब।
सड़क के नाम पर जंगलों का विनाश
लाखों पेड़ों की कटाई
बिना अनुमति वन क्षेत्र में काम
लकड़ी तस्करी के आरोप
पर्यावरण और स्थानीय मौसम पर भी असर
किसानों और आदिवासियों पर मार
बिना अनुमति खेतों में खुदाई
जमीन बर्बाद
मुआवजा नहीं
*विकास के नाम पर ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित*
*कमीशन का खेल: सिस्टम मालामाल*
*सूत्रों के अनुसार—*
अधिकारी–इंजीनियर–ठेकेदार – पेटी ठेकेदार गठजोड़
कमीशन के बदले घटिया काम पास
और इसी से—
आलीशान मकान
महंगी गाड़ियां
सोना–जमीन में निवेश
प्रशासनिक सिस्टम भी कटघरे में
कलेक्टर और CEO की निगरानी पर सवाल
NQM, SQM जांच सिर्फ औपचारिकता
प्री-प्लान विजिट और वीआईपी ट्रीटमेंट
यानी जांच तंत्र भी संदिग्ध
*अब सबसे बड़े सवाल*
क्या 5500 करोड़ के इस महाघोटाले की CBI/ED जांच होगी?
क्या गायब दस्तावेजों पर FIR दर्ज होगी?
क्या जिम्मेदारों की संपत्ति की जांच होगी?
या फिर हर बार की तरह मामला दबा दिया जाएगा?
*PMGSY का कहर जारी: सड़क के नाम पर उजड़ा आदिवासी का खेत, एक महीने से न्याय का इंतजार*
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत जिले में चल रहे निर्माण कार्यों में लापरवाही और मनमानी लगातार सामने आ रही है। ताजा मामला बीजापुर जिले के ग्राम चोखनपाल से जुड़ा है, जहां सड़क निर्माण के नाम पर एक गरीब आदिवासी किसान की पुश्तैनी जमीन उजाड़ दी गई।
पीड़ित किसान बुधरू माड़वी (60 वर्ष) ने कलेक्टर बीजापुर को दिए अपने लिखित आवेदन में आरोप लगाया है कि संबंधित ठेकेदार ने बिना अनुमति उसकी निजी कृषि भूमि पर जबरन खुदाई कर सड़क निर्माण शुरू कर दिया। इस दौरान खेत में गहरा गड्ढा बना दिया गया, जिससे जमीन पूरी तरह से खेती योग्य नहीं रही।
किसान का कहना है कि उसका पूरा परिवार इसी जमीन पर निर्भर है और अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि ठेकेदार ने खेत के किनारे की अतिरिक्त जमीन भी खोदकर मलबा सड़क निर्माण में उपयोग कर लिया।
*एक महीने बाद भी कार्रवाई नहीं*
पीड़ित ने करीब एक महीने पहले कलेक्टर को शिकायत दी थी, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे न केवल परिवार परेशान है, बल्कि गांव में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
*❗ ग्रामीणों में आक्रोश*
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर गरीब आदिवासियों की जमीन उजाड़ी जा रही है। बिना सहमति जमीन पर कब्जा और नुकसान की भरपाई न होना प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
*उठते बड़े सवाल*
बिना अनुमति निजी जमीन पर निर्माण कैसे हुआ?
शिकायत के बावजूद प्रशासन चुप क्यों?
क्या आदिवासी किसानों की जमीन यूं ही उजाड़ी जाती रहेगी?
*न्याय की मांग*
पीड़ित किसान ने ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी जमीन के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेकर पीड़ित को न्याय दिलाता है, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
*PMGSY सड़क निर्माण में अनियमितता: कोर क्षेत्र के ग्रामीणों ने की कलेक्टर से शिकायत*
कोर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बड़े काकलेड़, छोटे काकलेड़, ईरपागुटा एवं एडापल्ली के ग्रामीणों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में बताया गया है कि सड़क निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
नियमानुसार उच्च गुणवत्ता की सामग्री उपयोग करने के बजाय सड़क किनारे की मिट्टी और धूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा सड़क की निर्धारित मोटाई भी कम रखी जा रही है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है, जिससे आगामी बारिश के दौरान सड़क के क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार का निर्माण न केवल शासकीय धन का दुरुपयोग है, बल्कि ग्रामीणों के आवागमन के लिए भी खतरा उत्पन्न कर सकता है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषी ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा सड़क निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों के अनुरूप पूर्ण कराया जाए।
इधर, स्थानीय स्तर पर निर्माणाधीन पुल-पुलियों में प्रारंभिक दरारें और कमजोरी सामने आने की बात भी सामने आई है, जिससे गुणवत्ता को लेकर संदेह और गहरा गया है
*PMGSY निर्माण कार्यों की घटिया गुणवत्ता पर बिफरे भाजपा के पूर्व वनमंत्री महेश गागड़ा*
बीजापुर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अब राजनीतिक पारा चढ़ गया है। भाजपा के पूर्व वनमंत्री महेश गागड़ा ने निर्माण कार्यों की हालत देखकर कड़ी नाराजगी जताई है , उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि
“विकास जरूरी है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं।”
महेश गागड़ा ने अधिकारियों और इंजीनियरों को चेतावनी देते हुए कहा कि
“आजादी के बाद पहली बार इतनी तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन अगर इसमें गुणवत्ता नहीं रही तो यह जनता क साथ धोखा होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि PMGSY के जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर तत्काल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारें, अन्यथा सख्त कार्रवाई तय है।
*पूर्व वनमंत्री की सीधी चेतावनी:*
अगर घटिया निर्माण जारी रहा तो जिम्मेदारों पर होगी कार्यवाही, किसी को बख्शा नहीं जाएगा
