मंदिर तक पहुंच मार्ग का निर्माण, अतिरिक्त शेड का निर्माण सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होंगी: श्री मिश्रा
निरई माता क्षेत्र को आस्था के साथ-साथ इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की दिशा में सतत कार्य किया जाएगा
धमतरी – छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरालोड विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम मोहेरा में विराजित निराई माता का मंदिर एक अद्वितीय आस्था स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। घने जंगल और दुर्गम वर्ष के शिखरों के बीच स्थित इस मंदिर में केवल एक बार चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को कुछ घंटों के लिए मठों के दर्शनार्थ निकाले जाते हैं। इस अवसर पर आयोजित “माता यात्रा” में हजारों की संख्या में सितारे शामिल हैं।
मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रूप से निर्मित पत्थर की गुफा में निराकार के रूप में माता की पूजा की जाती है। यह सिद्ध है कि यहां साध्य मन से की गई प्रार्थना एक जैसा पूर्ण होती है। मन्नत होते हुए पूरी पर आस्था अपनी श्रद्धा पर विश्वास करते हैं।
इस साल धमतरी, गरियाबंद, रायपुर, बालोद सहित आसपास के अवशेष और पड़ोसी राज्य से भी करीब 30 से 40 हजार पर्यटक यहां पहुंचे।
रजिस्ट्रार अविनाश मिश्रा ने इसी माह 13 मार्च को
ग्राम मोहेरा क्षेत्र थे। उन्होंने स्थानीय लोगों से भी चर्चा की। हाल भी पूछा था. उसी समय के कार्यकारी अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि व्यापारियों की सुविधा के लिए मार्ग, प्रिया, स्वतंत्रता, अस्थायी शेड, व्यवस्था चिकित्सा एवं सुरक्षा प्रशासन गठित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए वन विभाग के माध्यम से विशेष प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया है। साथ ही मंदिर तक पहुंच मार्ग का निर्माण, अतिरिक्त शेड निर्माण का निर्माण किया जाएगा। सहायकों को बेहतर सहायक मिलें।
उन्होंने कहा कि निरई माता क्षेत्र को आस्था के साथ-साथ इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की दिशा में सतत कार्य किया जाएगा, जिससे स्थानीय पुरातत्व को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।
कलेक्टर ने इस चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर निरई माता मंदिर के दर्शन और स्मारक का स्वागत किया। उन्होंने मठ पर आश्रम और रेस्तरां से संवाद कर अपनी चेतावनियों और आवश्यक वस्तुओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
यहां प्रचलित परंपरा के अनुसार मंदिर में पूजा-सार्वजनिक का कार्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है। स्थानीय ईसाइयों के अनुसार महिलाओं के मंदिर में प्रवेश एवं प्रसाद ग्रहण करना बंद कर दिया जाता है, जिनकी संपूर्ण आस्था के साथ पालन किया जाता है।
प्रशासन द्वारा इस वर्ष के सफल आयोजन का व्यापक खंडित भाग, जिसमें सम्मिलित रूप से छात्रावासों को समाविष्ट एवं सुरक्षित दर्शन की सुविधा प्राप्त हुई। भविष्य में भी इस पवित्र स्थल के अलौकिक विकास एवं स्मारकों की एकता को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा।
