राजिम – रविवार को दोपहर 12:00 बजे दुतकैया में एक माह बाद जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। भगवान दास उइके, कलेक्टर गरियाबंद, ने गांव पहुंचकर महिला-पुरुष ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी शिकायतें सुनीं।
बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विशेष समुदाय के कुछ लोग लगातार अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि खेत-खलिहान या विद्यालय जाते समय उनके बच्चों और महिलाओं के साथ अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं। बच्चों को विद्यालय में मारपीट की धमकी दिए जाने की भी बात कही गई। ग्रामीणों का कहना था कि संबंधित समुदाय के अधिकांश पुरुष आपराधिक प्रवृत्ति के हैं, इसलिए उन्हें गांव से अन्यत्र शिफ्ट किया जाए ताकि गांव में शांति स्थापित हो सकें। साथ ही अतिक्रमण हटाने और आरिफ खान पर हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने की मांग भी की गई। ग्रामीणों ने अपने लोगों पर लगाए गए कठोर धाराओं को हटाने की भी मांग रखी।
गिरफ्तारी पर उठे सवाल
उपेंद्र के दादा हरिराम साहू ने कहा कि उनके नाती घटना के समय गांव में मौजूद नहीं थे, बल्कि घायल लोगों के उपचार हेतु अस्पताल में थे। इसके बावजूद रात में गांव पहुंचने पर उन्हें विभिन्न आपराधिक धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने इसे प्रशासनिक आतंकवाद” करार दिया।
प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप
ग्रामीणों ने दुतकैया हिंसा के लिए प्रशासन की विलंबित कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराते हुए बहुसंख्यक समुदाय के साथ प्रशासनिक बेरुखी का आरोप लगाया।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में वेदव्रत सिरमौर पुलिस अधीक्षक गरियाबंद, संयुक्त कलेक्टर एवं प्रभारी एसडीएम राजिम हिनेश्वरी बांधे, फिंगेश्वर तहसीलदार डिंपल ध्रुव, अमृत लाल साहू, थाना प्रभारी राजिम, सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
ग्रामीण पक्ष से सरपंच गिनी सोनी, उपसरपंच ज्ञानेश शर्मा, ग्राम पटेल लखनलाल, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष बोधन साहू, सचिव जितेंद्र यादव सहित सैकड़ों महिला-पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक में कलेक्टर ने सभी पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
