मामला कोडेनार पंचायत में शासकीय जमीन पर दुकानें बनाने का
किरंदुल — लोह नगरी किरंदुल से सटी कोडेनार पंचायत हमेशा से ही विवादों से घिरी प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की हेड लाइन बनकर सुर्खियों में बनी रहती है ।ऐसे ही एक ताजे मामले को लेकर कोडेनार पंचायत के सरपंच और उपसरपंच पर पंचायत में स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा के बगल में स्कूल की शासकीय जमीन में तीन दुकानों के निर्माण कार्य को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है ।उल्लेखनीय हैं कि पूर्व के शासन काल में वर्तमान सरपंच ही सत्ताशीन थी और वर्तमान समय में सत्ताधारी उप सरपंच की पत्नी ही उप सरपंच हुआ करती थी ।विशेष बात यह है कि पूर्व के शासन काल में सरपंच और उपसरपंच दोनों ही कांग्रेसी हुआ करते थे परंतु वर्तमान चुनाव में सरपंच और पूर्व की उपसरपंच के पति ने भाजपा प्रवेश करने के बाद भाजपा के समर्थन से जीता है ।विदित हो कि पूर्वर्ती छत्तीसगढ़ सरकार के शासन काल में ही निर्माणाधीन तीनों दुकानों का निर्माण कार्य समाचार पत्रों की हेड लाइन के बाद जिला प्रशासन ने रुकवा दिया था ।परंतु कांग्रेस छोड़ भाजपा प्रवेश करने के बाद कोडेनार पंचायत के भाजपाई सरपंच और भाजपाई उपसरपंच ने दुबारा तीनो दुकानों का निर्माण कार्य पुनः चालू करवाने की कोशिश की । दुकानों के निर्माण कार्य की शिकायत पर तहसीलदार बड़े बचेली और पालिका प्रशासन पूरे अमले और बुलडोजर के पंहुचा ।बुलडोजर ने अपने बूम से निर्माणाधीन दुकानों को तोड़ने के लिए दुकानों के कॉलम पर बूम रखा ही था कि भाजपाई सरपंच और उपसरपंच ने दबंगई दिखाते हुए नेताओं को फोन खटखटाना चालू कर दिया । फिर क्या था कोडेनार पंचायत के दोनों भाजपाई जनप्रतिनिधियों के सामने प्रशासन के बुलडोजर ने नतमस्तक होते हुए अपने बूम के रुख को ही बदल दिया । सवाल यह है कि किन जनप्रतिनिधियों के फोन से बुलडोजर का बूम दोनों पंचायत के जनप्रतिनिधियों के सामने नतमस्तक हुआ ।या कहीं बुलडोजर का डीज़ल तो खत्म नहीं हो गया था ।
