श्वेत क्रांति का उद्भव मॉडल जिला दुग्ध व्यवसाय से ग्रामीण समृद्धि की नई कहानी।

धमतरी – धमतरी जिला आज छत्तीसगढ़ में श्वेत क्रांति के नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रही है। जिला प्रशासन की दूरदर्शिता पहल, पशुपालकों की भागीदारी और सशक्त साझेदारी जिले में दुग्ध उत्पादन एवं संकलन में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पोषण स्तर और रोजगार सृजन को नई दिशा दी जा रही है।

दो महीनों में जिलों का दैनिक घनत्व संकलन 6,410 लीटर से बढ़कर 10,000 लीटर प्रतिदिन से अधिक हो गया है। जिला प्रशासन ने इसे प्रतिदिन 15,000 लीटर प्रति व्यक्ति तक पहुंचाने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। अर्थशास्त्री श्री अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में वोडाफोन बिजनेस को पारंपरिक उद्यम से आगे आधुनिक, संयुक्त और उद्यम का स्वरूप दिया गया है।

डेयरी उत्पाद का परमाणु नेटवर्क – सफलता की पत्रिका

जिले में अधिक से अधिक पशुपालकों को उत्पादक-संग्राहक साझेदारी से जोड़ा जा रहा है। दो माह पूर्व जहां केवल 47 समितियां सक्रिय थीं, वहीं आज यह संख्या 68 सहकारी समितियां तक ​​पहुंच चुकी है।लगभग 30,000 दुग्ध उत्पादक एवं संग्राहक इन उद्यमों से जुड़े हुए हैं। लंबे समय से क्रियाशील रखे गए बैंकों के ग्राहकों का तत्काल समाधान कर उन्हें पुनः सक्रिय कर दिया गया, जिससे दुग्ध संकलन में निरंतर वृद्धि संभव हो सकी।

डिजिटल भुगतान और माइक्रो एटीएम – विश्वसनीयता की स्थापना

उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए किश्तों में माइक्रो एटीएम जैसे डिजिटल सामान उपलब्ध कराए जाते हैं। अब सीधे पशुपालकों के बैंक पंजीकरण में भुगतान किया जा रहा है, जिससे सहायक कंपनी और व्यवसाय का प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। यह सुविधा ग्रामीण क्षेत्र में डिजिटल संप्रदाय का भी पासपोर्ट उदाहरण बन रही है।

इंफ़्रा एलेक्ट्रोमिक, बाज़ार तक सीधी बातचीत

नेशनल इंस्टीट्यूट डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से जिले में मिल्क कलेक्टर, कोल्ड इक्विपमेंट और कमिश्नर की स्ट्रॉन्ग श्रृंखला विकसित की गई है।वर्तमान में सेमरा बी भाठागांव और मुंबई में तीन मिल्क चिलिंग प्लांट कंपनियां हैं। कुरुद क्षेत्र में चौथे चिलिंग प्लांट को राज्य शासन से मंजूरी मिल गई है।इसके साथ ही गातापार ग्राम पंचायत में नव-निर्मित दुग्ध उद्योग संयंत्र को शीघ्र आरंभ करने की दिशा में ठोस प्रयास किये जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ही मूल्य निर्धारण संभव हो सकेगा।

पशुपालकों को वित्तीय और तकनीकी संबल

ग्रामीण पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण पशुपालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक लगभग 1,500 एपिसोड तैयार करने के लिए पशुपालकों को आवश्यक आवश्यकताओं के लिए बैंक सहायता प्रदान की गई है।जिले में 44 कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जिससे किसानों की नस्ल में सुधार और दूध उत्पादन में गुणात्मक वृद्धि हुई है।

समग्री तक विस्तार – समग्री विकास

अब दुग्ध व्यवसाय का लाभ केवल धमतरी और कुरुद तक सीमित नहीं रहेगा। मैग्रालोड नगर और जैसे सुदूर इलाकों में तेजी से नए अवशेषों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि हरपालक को संयुक्त उद्यम से जुड़े समान अवसर और अतिरिक्त आय सुरक्षा की जा सके।

तकनीकी दिशानिर्देश और स्वास्थ्य सेवाएँ

डेडबॉडी विभाग द्वारा कम कीमत वाली साइंटिस्ट टेक्निकल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पशुधन की टीम कृषि औषधि दवापान, पशु चिकित्सा नियंत्रण, पशुधन का उपचार और पोषण प्रबंधन सुनिश्चित कर रही है।स्वच्छ दूध उत्पादक, पोषक आहार निर्माण और दूध के पोषण के महत्व पर जागरूकता से लेकर ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य स्तर तक में भी सुधार हो रहा है।

ग्रामीण समृद्धि की मजबूत संस्था

आज धमतरी में डेयरी उत्पाद केवल आय का साधन नहीं है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन गया है। यह पहले ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए भी नए अवसर खोल रही है।

कलेक्टर  अविनाश मिश्रा ने जिले के सभी उत्पादक पशुपालकों और संग्राहकों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि “धमतरी जिले में पशुपालक और पशुपालक संघ के रूप में पशुपालक और पशुपालक संघ के सदस्यों की पहचान बताई गई है।”