बीजापुर शिक्षा विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर।

आरएसएस नेता पर निजी स्वार्थ के लिए कर्मचारियों पर दबाव डालकर करोड़ों की हेराफेरी कराने का आरोप।

मामले में शामिल दो कर्मचारी एक महीने से आफिस ने नदारद।

बीजापुर – जिले के शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि आरएसएस से जुड़े एक संघ नेता ने अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर निजी स्वार्थ के लिए विभागीय कर्मचारियों पर दबाव डाला और करोड़ों रुपये का गबन कराया। इस घोटाले में विभाग के दो कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

आरोपी कर्मचारी दफ्तर से नदारद

समग्र शिक्षा के सहायक जिला परियोजना अधिकारी पुरुषोत्तम चन्द्राकर और डीईओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 संजीव मोरला पर मामला दर्ज किया गया है। इनमें से एक अधिकारी को पहले ही कमिश्नर निलंबित कर चुके हैं। एफआईआर के बाद दोनों आरोपी दफ्तर से नदारद हैं और अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

भाजपा नेताओं पर जांच प्रभावित करने का आरोप

सूत्रों का कहना है कि भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के दबाव में जांच की गति धीमी है। जिन बैंक खातों में बिना सामग्री सप्लाई किए अवैध भुगतान किया गया, उन पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

दबाव में RMSA पोटाकेबिन अधीक्षकों ने किए वाउचर पर हस्ताक्षर

आरोप है कि संघ नेता एंव जिला शिक्षा कार्यालय से लगातार मिल रहे दबाव में RMSA पोटाकेबिन अधीक्षकों ने बिना किसी बिल और दस्तावेज़ के लाखों रुपये दो फर्मों के खातों में ट्रांसफर किए। अधीक्षकों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं मामले के उजागर होने के बाद घोटाले को छिपाने की कोशिश भी शुरू हो गई है। आनन-फानन में पोटाकेबिन आश्रमों में सामान सप्लाई कराया जा रहा है, वह भी बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर।

बिना बिल 42 लाख रुपये का भुगतान हुआ उजागर , मामला और भी उजागर होना बाकी

बीजापुर और भोपालपट्टनम ब्लॉक के पोटाकेबिन आश्रमों के लिए सामग्री खरीद के नाम पर 42 लाख 78 हजार 475 रुपये का भुगतान तीन फर्मों – कृतिवक इंटरप्राइजेस, एसबी कंस्ट्रक्शन और विमला इंटरप्राइजेस – को किया गया।

बीजापुर ब्लॉक में : ₹26,60,715

भोपालपट्टनम ब्लॉक में : ₹16,17,760

जांच में सामने आया है कि न तो बिल प्रस्तुत किए गए, न कोई स्वीकृति ली गई और न ही सप्लाई का स्तर देखा गया। आरोपी संजीव मोरला ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्होंने आरएसएस नेता के कहने पर भुगतान कराया।

यह घोटाला जिले में शिक्षा की बुनियाद मजबूत करने के नाम पर बनी करोड़ों की योजनाओं पर सवाल खड़े करता है। जिम्मेदार अफसरों और नेताओं की मिलीभगत ने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर दिया है।