सफर/ महेश राजा:
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-दादा,सब रामेश्वर जाने का कह रहे है,आप भी साथ चलोगे।
-नहीं,बेटे।इस उम्र में अब थकान ऋगती है,तुम सब हो आओ।
पोता जिद कर रहा था मैं हाथ पकड कर सब मंदिर दिखाऊंगा।
वे कह पडे,अब तो चलाचली की बेला है।अब तो उस लोक का सफर तय करना है।
-ऐसा क्यों कहते है,पापा।अभी तो आपको कृष का विवाह करना है।उसके बच्चे खिलाने है।
उन्होंने मौन हामी भर दी।सब की खुशी में वे खुश।जीवन मौत अपने हाथ में थोडे ही है।यह सफर भी कर लें,पूरे परिवार के साथ।
वे अपनी धार्मिक किताबें सहेजने लगे। 
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*महेश राजा*
महासमुंद। छत्तीसगढ़।
*9425201544*
