किरंदुल – छत्तीसगढ़ का लोकपर्व हलषष्ठी (कमरछठ) का पर्व लौहनगरी किरंदुल के रामपुर कैम्प,लक्ष्मणपुर कैम्प,गजराज कैम्प,धरमपुर कैम्प, भटटीपारा,वोरा कैम्प , साहू समाज एवं शीतला माता मंदिर फुटबॉल ग्राउंड, पुराना डबल स्टोरी कॉलोनी में महिलाओं द्वारा अपने अपने बच्चों के साथ एकत्रित होकर सामूहिक रूप से बड़े ही हर्षोल्लास सहित मनाया गया।यह पर्व माताओं का संतान के लिए किया जाने वाला, छत्तीसगढ़ राज्य की अनूठी संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जिसे हर वर्ग हर जाति मे बहूत ही सदभाव से मनाया जाता है।जिसे हलषष्ठी को हलछठ,कमरछठ या खमरछठ भी कहा जाता है।बता दें इस दिन भगवान श्रीकृष्ण जी के दाऊ बलराम जी का जन्मदिवस भी माना जाता हैं।राघव मंदिर के प्रधान पुजारी सत्येंद्र प्रसाद शुक्ल ने बताया कि यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।संतान प्राप्ति व उनके दीर्घायू सुखमय जीवन की कामना रखकर माताएँ इस व्रत को रखती है। हिन्दू मान्यता के अनुसार हरछठ के दिन ही शेषावतार माने जाने वाले भगवान बलराम का जन्म हुआ था ।ऐसे में इस दिन उनकी विधि विधान से पूजा करने पर संतान सुख की प्राप्ति होती हैं ।मान्यता है कि इस व्रत को करने पर बलदाऊ पूरे साल संतान की रक्षा करते हुए सुख समृद्वि प्रदान करते हैं ।
