महासमुंद – बार-बार सुशासन और जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। महासमुंद के कृषि विभाग में हुए 2.22 करोड़ रुपये के घोटाले पर अब तक किसी भी प्रकार. की कार्रवाई नहीं होना यह दर्शाता है कि शासन प्रशासन की मिलीभगत सेभ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है। इस संबंध में सटीक प्रमाणों के साथ कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह आरोप छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव और महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बार-बार यह दावा करते हैं कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम हो रहा है, लेकिन जब कृषि विभाग में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है, तब कार्रवाई क्यों नहीं की गई? चंद्राकर ने कहा कि उप संचालक कृषि कार्यालय, महासमुंद भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। उन्होंने अप्रैल 2025 से कलेक्टर, कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी), और विभागीय मंत्री को सभी प्रमाणों के साथ शिकायतें भेजी हैं, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। यहाँ तक कि अधिकारियों को स्मरण पत्र भी भेजे गए, पर फिर भी मामले को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी/कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से अवैध धनराशि अपने खातों में जमा करवा रहे हैं। 16 अप्रैल 2025 को कलेक्टर महासमुंद को इस विषय में शिकायत करने के बावजूद जांच तक शुरू नहीं की गई, जिससे संदेह और गहरा गया है कि प्रशासनिक स्तर पर भी भ्रष्टाचार में साझेदारी है। विशेष रूप से 22 नवंबर 2024 को जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के तहत लगभग 2.22 करोड़ रुपये की निविदा मेटलेक पॉवर स्पेयर की खरीद के लिए अपात्र फर्म ‘माता दी इलेक्ट्रिकल्स गरियाबंद’ को दी गई। इस उपकरण की वास्तविक कीमत 2000-2500 रुपये है, जबकि इसे 6300 रुपये प्रति यूनिट में खरीदा गया। यह सामान जिले के विभिन्न ब्लॉकों में भेजा गया, लेकिन किसानों ने अंश राशि जमा करने से इनकार कर दिया, जिससे इसका वितरण रुक गया और घोटाला सामने आया। इतना ही नहीं, जैविक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को दी जाने वाली अन्य वस्तुओं की जगह विभाग ने नियमों को दरकिनार करते हुए मेटलेक पॉवर स्पेयर को बांटने की कोशिश की। इसका उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार से धन अर्जित करना था।श्री चंद्राकर ने बताया कि उनकी शिकायत के बाद कलेक्टर द्वारा निविदा औरकार्यादेश को निरस्त कर दिया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से जिन अधिकारियों की संलिप्तता पहले दिन से रही, उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह स्थिति जिले के किसानों में भारी असंतोष और आक्रोश का कारण बनरही है।
