( भगवान जगन्नाथ ,देवी सुभद्रा ,भगवान बलभद्र के दर्शन पाने उमड़ा भक्तों का सैलाब )
किरंदुल- लौहनगरी किरन्दुल में श्री श्री जगन्नाथ सेवा समिति उत्कल समाज किरंदुल के तत्वाधान में विगत वर्षों की ही भांति इस वर्ष भी गुंडीचा मंदिर से बाहूडा यात्रा निकाली गई ।उल्लेखनीय है कि भगवान जगन्नाथ नौ दिनों के बाद अपनी मौसी के घर से श्री राघव मंदिर परिसर में स्थित श्री श्री जगन्नाथ मंदिर में गाजे बाजे के साथ जय जगन्नाथ के नारे के साथ भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के साथ पहुंचे । इस यात्रा को ही बाहुडा यात्रा कहा जाता है ।बाहूडा शब्द ओड़िया भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ होता है वापसी । इस दिन भगवान भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ विशाल रथों पर सवार हो कर गुंडीचा मंदिर से वापस अपने मुख्य मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं ।यह यात्रा भी रथ यात्रा की ही तरह भव्य होती है । बस इसकी दिशा विपरीत होती है । श्री जगन्नाथ सेवा समिति के द्वारा तीन रथों का निर्माण किया गया था ।
जिसमे भगवान बलभद्र को रथ तालध्वज ,बहन सुभद्रा को रथ दर्पदलन और भगवान जगन्नाथ को रथ नंदीघोष में विराजमान कर बाहुडा यात्रा का प्रारंभ किया गया । त्रिदेवों ने तीनों रथों पर सवार हो कर भक्तों को दर्शन दिये थे । भगवान जगन्नाथ की बाहुडा यात्रा श्री गुंडीचा मंदिर से प्रारंभ हो कर पुराना डबल स्टोरी कालोनी ,एसबीआई चौक ,शॉपिंग मॉल से होते हुए श्री राघव मंदिर परिसर में स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंची ।इस दौरान श्री जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष आर सी नाहक ,उत्कल समाज के अध्यक्ष अविनाश सवाई ,सचिव देवराज लिंका ,बृजेश मिश्रा ,एवं समिति के सदस्य तथा हजारों की संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित रहे ।
