‘मोर गांव, मोर पानी महाअभियान’ के तहत जल संरक्षण संवर्धन प्रशिक्षण कार्यकम आयोजित किया गया।

सरपंच, सचिवों व बिहान समूह की महिलाओं को जल संरक्षण व संरक्षण की जानकारी दी गई।

कांकेर – छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश अन्य कांकेर जिले में ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। उक्त संबंध में कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा बताया गया है कि जिले में औसत 1200-1300 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, फिर भी जिले में जल संकट की स्थिति बनी हुई है। इसके पीछे की झीलें, पहाड़ों में तीव्र सतही जल बहाव और ज्वालामुखी पुनर्भरण जैसे कारण हैं। यह संकट अत्यधिक गंभीर है, जहां अत्यधिक जल भंडार, मिट्टी में संग्रहालय भंडार की क्षमता कम है और क्षतिग्रस्त जल भंडार क्षेत्र, डूबे हुए कृषि को अत्यावश्यक बना दिया गया है।उन्होंने बताया कि इस वर्षा जल संरक्षण अभियान का लक्ष्य जन आंदोलन है, इसके लिए सभी जिलों के 454 ग्रामों के लिए 02 से 05 जून तक चार दिवसीय जल संरक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी 45 ग्रामों के उद्यमियों, सचिवों, रोजगार सहायकों, बिहान समूह के सदस्यों और जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा जल संरक्षण और जल संरक्षण की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि मोर गांव, मोर पानी की मुख्य सुविधा यह है कि यह मनोवैज्ञानिक नेतृत्व वाली योजना है। इस अभियान में नामांकन का निर्माण और क्षेत्रीय स्थानीय समुदाय के नेतृत्व में होता है। इसी प्रकार जल प्रबंधन के अंतर्गत वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है। युक्त धारा पोर्टल का उपयोग करके डेटा एकत्र किया जाता है, जो बेहतर योजना और निगरानी में मदद करता है। वॉटरवेल पोर्टल का उपयोग जल संसाधनों की निगरानी या प्रबंधन के लिए किया जाता है। उन्होंने आगे यह भी बताया कि भूवैज्ञानिक सूचना प्रणाली के खुले पुरातात्विक उपकरणों का उपयोग मानचित्रण और स्थानिक विश्लेषण में सहायक होता है। विभिन्न सरकारी मंथली के साथ ही एक साथ दाखिले के लिए आवेदन पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। क्षमता निर्माण और टेम्पलेट्स मजबूत बनाने का लक्ष्य है। जल संरक्षण के प्रयासों को सीधे तौर पर लोगों के सामूहिक हितों से जोड़ा गया है। इसके लिए सतत पर्यवेक्षण अनुप्रयोग की शुरुआत की जाती है और इसका मूल्यांकन किया जाता है। मोर गांव मोर पानी अभियान एक समग्र, सामुदायिक केंद्र और तकनीकी रूप से उन्नत दृष्टिकोण अपनाकर जल संरक्षण और प्रबंधन सुनिश्चित कर रहा है। इस अभियान के माध्यम से जिले में जल संरक्षण और संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का लगातार विकास हो रहा है, जिला प्रशासन के प्रयास से जिले में जल संकट से जल्द ही निदान मिलेगा।

द्वितीय परिणाम –

जल संरक्षण और भूमि उपचार के माध्यम से कृषि और जल क्रम प्रबंधन के तहत बेहतर जल सुरक्षा और प्रबंधन। इसी प्रकार स्थायी अचल निर्माण से रुकु जल संसाधन और प्राकृतिक संसाधनों का अतिक्रमण का निर्माण किया जाएगा। कृषकों से सर्वोत्तम जल रसायन और कृषकों से ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही स्थानीय और स्वामित्व की भागीदारी से अल्पावधि राज और महिला स्वयं सहायता समुदाय की क्षमता में वृद्धि होगी, इससे स्थानीय विकास प्रयासों में उनकी भागीदारी और नेतृत्व मजबूत होगा और वे अपने गांव के लिए बेहतर निर्णय ले सकेंगे।