कषि विभाग लापरवाह, अधिकारी नहीं जाते किसानों से मिलने ।
राजशेखर नायर
नगरी – धान की फसल में तना छेदक, छत्तीसगढ़ी बोलचाल में उस्का के नाम से जाने जाने वाला कीट प्रकोप से किसान इन दिनों चिंतित है, हजारों रुपए की कीटनाशक के प्रयोग के बाद धान की फसल में यह कीट प्रकोप फैलता जा रहा है, किसानों ने बताया कृषि विभाग के अधिकारियों का सहयोग कभी प्राप्त नहीं होता है, वे गांव में नहीं आते है और कीट प्रकोप से बचाव के उपचार के तरीके भी नहीं बताते, जिसकी वजह से कृषि दवा बेचने वालों दुकानदारों के बताए अनुसार कीटनाशकों का प्रयोग करने के बाद भी, फसल में कीट प्रकोप फैलता ही जा रहा है.
ग्राम फरसियां के नयापारा निवासी किसान लोमस नेताम और पारिवारिक सदस्यों द्वारा लगभग 12 से 13 एकड़ कृषि भूमि में धान कि फसल लगाई गई है धान में बालियां भी आ गई हैं पर अब उस्का याने तनाछेदक कीट प्रकोप फैलता जा रहा है. हजारों रुपए के कीटनाशकों का प्रयोग के बाद भी कीट प्रकोप फैलता जा रहा है. गांव के सरपंच केशव टेकाम, कोमल नेताम, लोमस नेताम को कीट प्रकोप कि वजह धान की काम पैदावार कि चिंता सताने लगी है.
धान कि बालियाँ खोखली और साफे होती जा रही है, कीट धान के पौधों के नीचे, तने को अंदर से खा रहे हैं, जिससे तन सूखता जा रहा है, जिससे धान के उत्पादन काफी कम होने की चिंता किसानों को सताने लगी है.किसानों ने बताया की कृषि विभाग के अधिकारी कभी नहीं आते, ना ही कीट प्रकोप से बचाव के लिए आवश्यक उपाय बताते है, मजबूरी में किसान कृषि दवा बेचने वाले दुकानदारों द्वारा जो भी महंगी कीटनाशक दवा थमा देते हैं इसका प्रयोग करना पड़ता है.

फोटो- किसान लोमस नेताम- कृषि विभाग के कर्मचारी नहीं आते, ना ही किसी तरह की कीट प्रकोप या फसल में होने वाली अन्य बीमारियों से बचाव की जानकारी देते. कृषि दवा विक्रेताओं द्वारा दिए गए हजारों रुपए की महंगी दवाइयां का छिड़काव करने के बाद भी कीट प्रकोप फैलता जा रहा है.ग्राम सरपंच-केशव टेकाम- तेज गर्मी की वजह से खेतों में पानी तेजी से सूखता जा रहा है जिसकी वजह से तना छेदक किट प्रकोप फसलों को नुकसान पहुंचा रही है, कृषि विभाग के अधिकारियों को बचाव के उचित उपचार बताना चाहिए।
