( पूर्व के वर्षो में भी पालिका की विवादित रसीद बुक के कारण टेंडर हो चुके हैं निरस्त )
( नाका चालू नहीं हुआ और बुक क्रमांक हुआ 80 )
किरंदुल — छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे अमीर नगर पालिका में सुमार किरंदुल नगर पालिका फिर एक बार वितीय वर्ष 25 -26 के लिए विगत दिनों हुए अस्थायी दखल शुल्क की वार्षिक निविदा को लेकर समाचार पत्रों की हेड लाइन की सुर्खियों में बनी हुई है । विदित हो कि नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी के द्वारा 10 मार्च को जारी पत्र के अनुसार किरंदुल नगर पालिका परिषद के अस्थायी दखल शुल्क वसूली हेतु बंद लिफाफे में ऑफर 10 मार्च को कार्यालयीन अवधि तक आमंत्रित किये जाने का उल्लेख किया गया है ।परंतु विचारणीय प्रश्न यह है कि पालिका परिषद द्वारा किरंदुल पालिका के लिए अस्थायी दखल शुल्क वसूली की वार्षिक निविदा को लेने वाले ठेकेदारों को इसकी सूचना ना मिले इस कारण पालिका के द्वारा अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अस्थायी दखल शुल्क वसूली की सूचना समाचार पत्रों के माध्यम से 10 मार्च के पहले ना दे कर 11 मार्च के समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है । विदित हो कि पिछले वितीय वर्ष में भी करीबन 5 से 7 उन्ही निविदाकर्ताओं ने निविदा फॉर्म जमा किया था ।और इस वितीय वर्ष 25 -26 के लिए भी अस्थायी दखल शुल्क के टेंडर प्रक्रिया के लिए भी उन्ही छह से सात निविदाकर्ताओं ने निविदा फॉर्म खरीद कर ईएमडी के साथ जमा किये थे ।
चर्चा के अनुसार कहीं निविदाकर्ताओं के द्वारा रिंग बनाकर पालिका प्रशासन को चुना लगाने की मंशा हैं या फिर किरंदुल पालिका प्रशासन ही अन्य ठेकेदारों को गुमराह करते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा से 10 मार्च से पूर्व अस्थायी दखल शुल्क वसूली की निविदा का समाचार पत्रों में विज्ञापन ना दे कर निविदा फॉर्म खरीदने की समयावधि बीत जाने के बाद समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा सी प्रतीत होती है ।वर्तमान में विवादितो के बीच फिलहाल तो पालिका का अस्थायी दखल शुल्क वसूली तो विवादितो के बीच वर्तमान ठेकेदारों ने शुरू कर दी है ।परंतु चर्चा का विषय है कि टेंडर लिये ठेकेदार को जो रसीद पालिका ने वसूली के लिए जारी की है उसमें पालिका परिषद के किसी प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है ना तो सीएमओ और ना ही आर आई और ना ही ए आर आई के हस्ताक्षर के बिना ठेकेदार को किसने रशीद बुक जारी कर दी ।सोचने वाली बात तो यह भी है कि कहीं वसूली का टेंडर लेने वाले ठेकेदार ने रशीद बुक किसी प्रिंटर से बनवा कर पालिका की सील का इस्तेमाल तो रसीद बुक में नहीं कर लिया ।
