प्यासी नवागांव एनीकट की सुध लेने वाला कोई नहीं लोगों ने सवाल किया क्या सरकार एनीकट को सुखा रखने के लिए करोड़ों रुपया खर्चा कर रही है नवागांव एनीकट खाली पानी का लेवल हुआ नीचे

प्यासी नवागांव एनीकट की सुध लेने वाला कोई नहीं

लोगों ने सवाल किया क्या सरकार एनीकट को सुखा रखने के लिए करोड़ों रुपया खर्चा कर रही है

नवागांव एनीकट खाली पानी का लेवल हुआ नीचे

राजिम । त्रिवेणी संगम से लगा हुआ नवागांव एनीकट इन दिनों पूरी तरह से खाली हो गया है। पानी की एक बूंद इसमें नहीं है जबकि सरकार प्रदेश के करोड़ों रुपया खर्चा कर इस एनीकट का निर्माण किया है। सन 2015 में तकरीबन 30 करोड़ की लागत में जल संसाधन विभाग धमतरी के देखरेख में इनका निर्माण हुआ। ताकि संगम में बारहो महीना पानी भरा रहे। इसी उद्देश्य को लेकर संगम के ऊपर में इन्हें आकार दिया गया। वहीं इस एनीकट से 50 गांव के लोगों को फायदा मिलता है। इनके अलावा जिले के राजिम शहर, रायपुर जिला के नवापारा शहर तथा धमतरी जिला के अनेक गांव के पानी का लेवल बना रहता है। पिछले वर्ष यह पानी से लबालब था। परंतु इस बार विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते महाशिवरात्रि के बाद भी दो गेट खुला रहा जिनसे लाखों लीटर पानी बर्बाद हो गया। पानी की धार चलता रहा और जलाशय खाली होता गया। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कान में रुई डाल कर ऐसे सोए हुए थे कि उन्हें भनक तक नहीं लगी जैसे तैसे पानी खत्म होने को था तब वह गहरी नींद से जागे और गेट को बंद किया तब तक पानी निकल चुका था अब यह नवागांव एनीकट मैदान में तब्दील हो गया है। मिट्टी व रेत के कण ही दिखाई दे रहे हैं अब यह पूरी तरह से सुख गई है। एनीकट में पानी की दरकार है अभी पूरा गर्मी के दो महीना मई और जून बचा हुआ है। वैसे भी पारा 40 से पार हो गया है। भीषण गर्मी शुरू हो गई है। सुबह से ही सूर्य देव रौद्र रूप में दिख रहे हैं। पानी नहीं होने के कारण वाटर लेवल पूरी तरह से नीचे जा चुका है। यहां तक की पशु पक्षियों के पीने के लिए भी पानी नहीं बचा है। बता दें कि इनकी जलभराव क्षमता राजिम, नवागांव, चौबेबांधा,सिंधौरी, बरोंडा,बुडेनी भेंडरी तक रहती है। चौबेबांधा परसवानी पुल से समुद्र जैसा नजारा दिखता था। किंतु आप सब गायब हो गया है। दिख रहा है तो मात्र घास फूस और रेत व मिट्टी के कण। यह भी पूरी तरह से सुख गई है तथा इसमें दरार आ गया है। इसी एनीकट से त्रिवेणी संगम को पानी मिलता है लेकिन अब संगम भी पानी के एक एक बूंद के लिए तरसेगी। जिनका पूरा श्रेय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को जाता है। स्थानीय लोग विष्णु जांगड़े, दीपक साहू, राजू ठाकुर, दीनबंधु, अनिल जांगड़े, गोकुल साहू ने कहा कि सरकार मात्र एनीकट निर्माण करके ढिंढोरा पीट रही है असल में इसमें पानी भरना लगता है उनकी जिम्मेदारी नहीं है। तभी तो यह सूखा पड़ा हुआ है। जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं और ना ही जनप्रतिनिधि। यह बड़ी चिंता का विषय है। उल्लेखनीय है कि इस एनीकट में पानी सिकासेर जलाशय से ही आता है तब कहीं यह लबालब होता है। जब से इनका निर्माण हुआ है तब से लेकर मात्र दो ही वर्ष गर्मी के दिनों में पानी भरा रहा बाकी तीन वर्षों से सूखा ही रहा है इस पर चिंता करने वाला कोई नहीं दिख रहा है लोगों ने प्रदेश के जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे, विधायक अमितेश शुक्ला के साथ जल संसाधन विभाग के शीर्षस्थ अधिकारियों से शीघ्र पानी भरने की मांग की है।