
अनूपपुर/एस के मिनोचा/ जब से अनूपपुर तुलसी महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य परमानंद तिवारी आये है महाविद्यालय की स्थिति बहुत ही खराब हो गयी है। महोदय हमेशा किसी न किसी मामले में सुर्खियों में रहते हैं। दादागिरी, छात्रों से मारपीट के मामले में बहुत आगे हैं। इनके समय से छात्र इनसे कभी भी खुश नही रहे कॉलेज में पढ़ाई कम नेतागिरी और टाइम पास कुछ ज्यादा होता हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय दिख रहा हैं। ये वो ही कार्य करना पसंद करते है जो इनको पसन्द होता हैं उसका असर चाहे कुछ भी पड़े।
मुख्यालय स्थित शासकीय तुलसी महाविद्यालय में पिछले 2 वर्षों से पढ़ाई व्यवस्था वैसे भी लड़खड़ाई हुई थी और अब तो कोरोना काल में यहां के छात्रों का भविष्य और भी अंधकार में डाल दिया है। सत्र 2021 में नवंबर, दिसंबर में उच्च शिक्षा विभाग ने महाविद्यालय प्रारंभ कर पढ़ाई लिखाई शुरू की थी वही तुलसी महाविद्यालय के प्राचार्य परमानंद तिवारी द्वारा महाविद्यालय में इस दौरान तरह-तरह के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में जबरदस्त बाधा उत्पन्न हुई। वही छात्र पढ़ाई के नाम से महाविद्यालय पहुंचते थे, लेकिन क्लास रूम के जगह उन्हें कार्यक्रम स्थल में बैठा दिया जाता था। जिस कारण से कई छात्र महाविद्यालय ही आना बंद कर दिए थे।
छात्रों को लाभ नहीं
सूत्र बताते हैं कि महिला दिवस से लेकर विश्व वसुंधरा दिवस मनाने वाले प्राचार्य परमानंद तिवारी महोदय के वेबीनार और सेमिनार से तुलसी महाविद्यालय के छात्र – छात्राओं को कोई लाभ नहीं होता, बल्कि इस वेबीनार और सेमिनार के आयोजन का लाभ महाविद्यालय के पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापकों को ही होता है, जो कि इस आयोजन का सर्टिफिकेट प्राप्त कर यू.जी.सी के नियमों के तहत अपना सर्विस रिकॉर्ड सुधारते हैं। शायद यह आयोजन इसलिए ही अधिक आयोजित किया जाता है। कुल मिलाकर यहां के विद्यार्थियों का भविष्य नित नवीन नियमों के कारण अंधकारमय हो गया है ।
