प्रमोद दुबे
महासमुंद – पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि किसान अपनी उपज बेचने अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन सरकार या अफसरों को इससे कोई सरोकार नहीं है। साय सरकार द्वारा धान खरीदी को प्रभावित करने सुनियोजित तरीके से कई बाधाएं सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें एक तो किसानों का टोकन नहीं कटना, किसानों से 50 प्रतिशत बारदाने की डिमांड करना, रकबा संशोधन कर कम खरीदी करना तथा धान खरीदी की शुरुआत से लेकर आज तक किसी भी समिति से एक दाना धान का उठाव नहीं करवाकर सरकार धान खरीदी को पूरी तरह प्रभावित करने का प्लान तैयार कर रही है। श्री चंद्राकर ने कहा कि अभी जो प्रमुख समस्या सामने आ रही है, वह टोकन की समस्या है। इसके अलावा उठाव नहीं होने से कई समितियों में शीघ्र ही धान रखने जगह की कमी का समस्या सामने आ सकती है। जिससे धान खरीदी पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका से इंकार भी नहीं किया जा सकता। श्री चंद्राकर ने कहा कि ऑनलाइन एप में टोकन नहीं कटने से ऑफलाइन टोकन के लिए किसानों को समितियों के चक्कर काटने मजबूर होना पड़ रहा है। टोकन तुहर हाथ मोबाइल ऐप केवल सफेद हाथी साबित हो रहा है। यह ऐप सुबह 9.30 बजे खुलता है। पहले तो ऐप खुलता ही नहीं और अगर कनेक्ट होता भी है। तो दो मिनट के अंदर ही समिति में टोकन लिमिट दिखाकर खरीदी की सीमा खत्म बताता है। खरीदी की लिमिट के कारण इस ऐप से टोकन किसानों के हाथों तक नहीं पहुंच रहा है। श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार ने धान खरीदी में 14 दिन देरी कर पहले ही किसानों को परेशानी में डालने का काम किया है। देर से धान खरीदी शुरु होने के कारण टोकन के लिए होड़ मच रही है। इससे खरीदी केंद्रों की लिमिट जल्दी खत्म हो जा रहा है और बचे हुए किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा किसानों को धान की कटाई, मिंजाई छोड़कर समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसान अपना काम छोड़कर टोकन काटने समितियों के चक्कर लगा रहे है। उन्होंने बताया कि अधिकांश किसानों के पास सामान्य कीपैड मोबाइल उपलब्ध है। ग्रामीण इलाकों के रहने वाले किसान के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं होने से और पड़े लिखे नहीं होने की वजह से टोकन कटवाने च्वाइस सेंटर भी पहुंच रहे हैं। सुबह 9 बजे से ही ग्रामीण इलाकों के कंप्यूटर केंद्र में किसानों की भीड़ देखी जा सकती है। जिससे उन्हें अलग से समय और पैसों की नुकसान हो रहा है। ऑनलाइन टोकन एप रोजाना सुबह 9.30 बजे खुलता है और कुछ ही मिनट में टोकन लिमिट समाप्त होने का नोटिफिकेशन आ जाता है। कई समितियों में ऑफलाइन टोकन कटाने के लिए किसान सुबह 4 बजे से लाइन लगा रहे हैं। टोकन के लिए किसानों की परेशानी को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि सरकार सुनियोजित तरीके से धान खरीदी बाधित कर रही है।

