जांजगीर-चांपा :- राजभाषा पखवाड़ा-2024 के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं के पुरस्कार विजेताओं को दिनांक- 21.10.2024 को महाप्रबंधक महोदया के करकमलों से पुरस्कृत किया जायेगा, जिसमें इस वर्ष स्वरचित काव्यपाठ, गीत एवं गज़ल गायन प्रतियोगिता में मुख्यालय जनसंपर्क विभाग में कार्यरत डॉ. सुरेश पैगवार को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, द्वितीय स्थान पर हर्षल नागदेवते परिचालन विभाग, तृतीय स्थान पर प्रियंका फुलझेले कार्मिक विभाग तथा सांत्वना पुरस्कार वाणिज्य विभाग के कार्यालय अधीक्षक प्रवीन कुमार सलूजा को प्राप्त हुआ है, जिन्हें नगद राशि के साथ महाप्रबंधक के कर कमलों से पुरस्कृत किया जायेगा |राजभाषा प्रश्न मंच प्रतियोगिता में भी जन संपर्क विभाग के प्रचार निरीक्षक संजय कुमार पाण्डेय एवं डॉ. सुरेश पैगवार की युगल टीम को प्रेरणा पुरस्कार प्राप्त हुआ है, जिन्हें महाप्रबंधक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की अध्यक्षता में जोनल सभा कक्ष, तीसरा माला में आयोजित क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की 71वीं बैठक के अवसर पर पुरस्कृत किया जायेगा, जिसमें जोन के सभी विभागाध्यक्ष उपस्थित रहेंगे |बचपन से ही साहित्य और संगीत में रुचि रखने वाले एवं बड़े बड़े साहित्यकार और संगीतकारों के संगत में रहने वाले सुरेश पैगवार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय बिलासपुर के जन संपर्क विभाग में कार्यरत हैं, उनके द्वारा रचित रेल गीत काफी लोकप्रिय हुआ है, रेलवे ही नहीं आम जन भी उतने ही चाव से उस गीत को सुनते हैं, उनके द्वारा रचित मतदाता जागरूकता गीत, आल्हा छंद में जांजगीर जिले की बखान करता गीत जिसे पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विमोचित किया गया है। श्रमिकों के ऊपर श्रम की महत्ता प्रतिपादित करता गीत, रक्षा बंधन पर लिखे गीत, गंगा पर लिखे गीत, श्रृंगार रस में लिखे कई गीतों को छालीवुड के प्रसिद्ध गायक, गायिकाओं द्वारा गाया गया है। ये सब ने सोशल मीडिया में काफी लोकप्रियता पाई है रोज हजारों लोग सुन रहे हैं। उनकी कृति ‘सूर्योदय’ सजल संग्रह को रेलवे भर्ती बोर्ड के गरिमामय समारोह में तात्कालिक अपर महाप्रबंधक एवं आरआरबी के चेयरमैन, सेक्रेट्री तथा मुख्य राजभाषा अधिकारी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के कर कमलों से विमोचित किया गया है। उन्हें साहित्यिक सेवा के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से अलंकृत भी किया गया है।”कोई भी कार्य या सेवा यदि निस्वार्थ भाव से किया जाय, तो वो सब कुछ दिला देता है जो कहा जाता है कि किस्मत वालों को नसीब होता है, आवश्यकता है तो लगन और समर्पण की।“पैगवार अपनी साहित्यिक उपलब्धियों को अपने परिवार, समाज और गुरुओं को समर्पित करते हैं। वे हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर के साथ साथ शास्त्रीय संगीत में भी पढ़ाई किए हैं जिसके चलते उनकी रचनाओं में रस, छंद, अलंकार युक्त होने के साथ साथ गेयता रहती है। वे नेशनल सिविल डिफेंस कॉलेज नागपुर से आपदा प्रबंधन और फायर सेफ्टी में डिप्लोमा धारी भी हैं। उनके साहित्य और रेलवे की अटूट सेवा को देखते हुए विशेष रूप से रेल मुख्यालय में रखा गया है। वे हिंदी और छत्तीसगढ़ी में समान रूप से कलम चलाते हैं। सैकड़ों सम्मान पत्रों से सुशोभित एवं अनेकों कवि सम्मेलनों में अपनी कविता का जादू प्रदर्शित करने वाले सुरेश पैगवार अपने जिला, प्रदेश और देश के दर्जनों साहित्यिक संगठनों के पदाधिकारी हैं, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक, राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ उद्घोषक संघ एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के जिला अध्यक्ष हैं। डॉक्टर पैगवार की इस उपलब्धि के लिए रेल परिवार, साहित्यिक परिवार, समस्त स्वजन, शील साहित्य परिषद, राष्ट्रीय कवि संगम, कवि लोक साहित्य परिषद, छत्तीसगढ़ उद्घोषक संघ, सजल सर्जना समिति, छंद के छ, छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद, राष्ट्रीय काव्य रसिक मंच, कर्नाटका साहित्य अकादमी, भव्या फाउंडेशन, कृतिकला एवं साहित्य परिषद के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उनकी इस उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त किया है।
