*22 अप्रैल पृथ्वी दिवस पर विशेष*
*पृथ्वी को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए ,पर्यावरण संरक्षण का लेना होगा संकल्प- उपाध्याय*
कोरिया एस के मिनोचा
मनेंद्रगढ़/ जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी के बढ़ते तापमान के कारण आने वाले मई और जून में पृथ्वी का तापमान और बढ़ेगा एवं इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है- इस आशय का विचार विश्व पृथ्वी दिवस पर व्यक्त करते हुए पर्यावरणविद सतीश उपाध्याय ने कहा।
बढ़ते हुए वैश्विक तापमान एवं पर्यावरण संरक्षण में हो रही तेजी से हानि श्री उपाध्याय ने कहा कि- लगातार घटते जंगलों एवं घटती जैव विविधता से 8 राज्यों में जलवायु परिवर्तन का विशेष कुप्रभाव देखने को मिल रहा है । ।इसमें छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार, झारखंड ,असम, मिजोरम, उड़ीसा अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल सम्मिलित है ।
श्री उपाध्याय ने बताया पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंतित है एवं प्राकृतिक वातावरण को स्थाई रखने के लिए एवं इसमें सुधार रखने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें पेरिस जलवायु समझौता भी शामिल है ।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा एक वैश्विक मुद्दा है इसीलिए दुनिया के 40 देश पेरिस जलवायु समझौते में हिस्सा ले रहे हैं ।उन्होंने कोरोनावायरस के संदर्भ में यह कहा कि अभी एक थोड़ी सी हलचल से पूरा हिंदुस्तान ऑक्सीजन के महत्व को समझने की केवल कोशिश कर रहा है ।यह सभी जानते हैं कि ऑक्सीजन हमें पेड़ पौधों से मिलती है और आने वाले समय में यदि पेड़ पौधे इसी प्रकार कटते रहे तो सिलेंडर में भरने के लिए ऑक्सीजन भी मिलना मुश्किल हो जाएगी। पर्यावरणविद सतीश उपाध्याय ने वैश्विक तापमान में वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए पृथ्वी पर हरियाली के लिए हर स्तर पर आम आदमी को प्रयास करने की अपील की है ।वैश्विक संदर्भ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हो रहे कार्य के संबंध में उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन को लेकर एक बड़ा सम्मेलन विश्व स्तर पर आयोजित होने जा रहा है जिसमें भारत की ओर से पर्यावरण मंत्री जलवायु परिवर्तन पर विचार व्यक्त करेंगे एवं दुनिया को जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से बचाने के लिए पेरिस जलवायु समझौते के तहत अपनी नई रणनीति के तहत अपने कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य को सामने रखेंगे।
उन्होंने बताया कि वैश्विक तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है जिसके कारण आम आदमी और वन्य प्राणियों को आने वाले समय में तीव्र त्वचा रोगों सहित विभिन्न चर्म रोगों का भी सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर पेरिस जलवायु समझौते पर गंभीरता से पालन किया गया तो दुनिया के तापमान वृद्धि को रोका जा सकता है। उन्होंने जल संकट पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पानी के संकट को टालने के लिए वर्षा जल बचाने के लिए हमको अभी से प्रयास करना होगा। जल संकट से बचाव के लिए सभी का योगदान जरूरी है । आने वाले समय में ऑक्सीजन एवं मनुष्य जीवन को संरक्षित करने के लिए हर व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने एवं ऑक्सीजन देने वाले एकमात्र स्त्रोत पेड़ों को बचाना एवं इसके संरक्षण की दिशा में कार्य करना बहुत जरूरी है।
