माँ हूँ मैं l
माँ हूँ मैं नित,अपना धर्म निभाती हूँ । ममता की खातिर , हर कर्म कर जाती हूँ । कोख की पीड़ा सहती मैं , तब धरती बन जाती हूँ। अपना रक्त, साँसें देकर, वजूद नया बनाती हूँ । अस्तित्व का कण-कण, मैं उसके लिए लुटाती हूँ माँ हूँ मैं————- संग चलती हूँ सदा मैं, उसके…
