माँ हूँ मैं l 

माँ हूँ मैं नित,अपना धर्म निभाती हूँ । ममता की खातिर , हर कर्म कर जाती हूँ । कोख की पीड़ा सहती मैं , तब धरती बन जाती हूँ। अपना रक्त, साँसें देकर, वजूद नया बनाती हूँ । अस्तित्व का कण-कण, मैं उसके लिए लुटाती हूँ माँ हूँ मैं————- संग चलती हूँ सदा मैं, उसके…

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कविता- माँ महादेवी है l 

कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़ जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम इकाई। माँ शक्ति है, माँ भक्ति है, माँ है देवी के रूप। माँ करुणा है, माँ दया है, माँ है विश्व अनूप।। माँ ज्ञान है, माँ विज्ञान है, माँ है प्रथम गुरु। माँ सुख है, माँ शांति है, माँ से जीवन शुरू।। माँ प्रकाश है,…

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सात वर्ष के बालक सिद्धार्थ शर्मा की पुस्तक ‘मुझे तो सब अच्छा लगता है’ प्रकाशित l 

राजिम :-  सात वर्षीय बालक सिद्धार्थ शर्मा की पहली पुस्तक ‘मुझे तो सब अच्छा लगता है’ हाल ही में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक में लंबी कविता संगृहीत है। पाठकीय सुविधा के लिए इसे सौ अलग-अलग शीर्षकों में बाँटा गया है। लगभग एक सौ एक्कीस पृष्ठों में फैली यह लंबी कविता, जहाँ एक ओर, काव्यात्मक…

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।।तथागत बुद्ध जयंती पर विशेष।।

शाक्य वंश राजघराने, प्रगट भये सिद्धार्थ। माता महामाया देवी, पिता शुद्धोधन आर्य ।।1।। महामाया सतलोक गई, गौतमी किया पालन। विद्याओं से निपुण हुए,जीवन बना सदाचरण।।2।। भविष्यवक्ता अजीत मुनि से, राजा हुए भयभीत। कपिलवस्तु में वस्तु बिछा दी, भोगों के अगणित।।3।। यौवन की परिपक्वता में ,यशोधरा से हुई सगाई। महाराज हुए प्रसन्न,राजभवन में बजी शहनाई।।4।। गृहस्थ…

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मेरा इतिहास लिखना— (मजदूर की अंतर्व्यथा)

——//—–//—//—– क्या तुम मेरा कोई इतिहास लिख सकते हो| सर्वहारा वर्ग में,मुझे खास लिख सकते हो|| फटे कपडे़ तंग जिंदगी,टूटा आवास लिखना| गर्दिशों में जीता हुआ,इंसान खास लिखना|| मेरे नाम यह धरती और,नील गगन लिखना| लिख सको तो बाग-बगीचा,चमन लिखना|| क्या मुझ पर गरीबी की मार लिख सकते हो- लिख सको तो लाल किला,और ताज…

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कइसे कलजुग आगे—

——-///—-///—-///—- कइसे कलजुग आगे भगवान-2 सब बेचागे धरम अऊ ईमान– सुनो बेंदरा ल कुकुर डर्रावत हावय, मुसुवा ह बिलई ल दौड़ावत हावय| देख कऊँवा ह गाना सुनावत हावय, सच कोयली ह देख लजावत हावय|| कइसे कलजुग आगे भगवान_2 सब होवत हे आन के तान– बेटा ह घर म करत हे सियानी, बिन मौसम के गिरत…

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