🌹मैं मजदूर🌹
मैं मजदूर,, कभी बेबस, तो कभी मजबूर, उपेक्षित रहकर जग में मशहूर| आगत से लेकर,अतीत तक, प्रेरक से लेकर, प्रतीक तक, इस कायनात को मैंने ही तो, अपने हाथों से सिरजाया है, फिर भी क्यूँ मेरे हिस्से में आखिर, उपेक्षा और तिरस्कार ही आया है? गगनचुंबी इमारतें,मैंने ही बनाया है, ताज व मीनार मैंने ही…
