छत्तीसगढ़ प्रांत जाँजगीर के उभरते हुए कवि गौरव राठौर जी के पंद्रह मुक्तक-
1. ज्ञान का अंबार दे हे माँ शारदे ज्ञान हमें निसार दे हे माँ शारदे अज्ञान का अँधेरा सदा मिटाना यहाँ हमें ज्ञानी संसार दे हे माँ शारदे।। 2. ज्ञानियों का ज्ञान ही वस्त्र होता है जो अज्ञानी है सदा वही रोता है खलता जो हमसे आगे बढ़ते यहाँ यत्न से सपने वो भी सँजोता…
