नवापारा राजिम :- प्रारंभ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवंम महर्षि वेदव्यास की पूजा अर्चना की, बाल सभा के प्रमुख श्वेता बया एवं कक्षा पांचवी के कक्षा कप्तान भास्कर सिन्हा ने अतिथियों का गुलाल लगाकर स्वागत किया तथा कक्षा पांचवी के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां की सुंदर प्रस्तुति दी, गोपाल यादव प्रधान पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा प्राचीन काल से हमारे देश में गुरु शिष्य परंपरा विद्यमान रही है गुरु का स्थान शिवाजी के लिए समर्थ रामदास, स्वामी विवेकानंद के लिए रामकृष्ण, चंद्रगुप्त के लिए चाणक्य, श्रीराम के लिये वशिष्ठ, श्रीकृष्ण के लिये सांदीपनि, अर्जुन के लिये द्रोणाचार्य पूजनीय रहे हैं, जिनसे शिक्षा प्राप्त करते हैं उन्हें गुरु के रूप में मान्यता देते हैं तब शिष्य को गुरु दक्षिणा देना होता था इस प्रकार की परंपरा का निर्वहन वर्तमान में गुरु आश्रमो में आध्यात्मिकता के साथ दिखाई देता है इसी गुरु शिष्य परंपरा के चलते भारत कभी विश्व गुरु रहा है तब भारत के श्रेष्ठ लोग ऋषि मुनि तपस्वी दुनिया को सभ्य और श्रेष्ठ बनाएंगे कृणवंतो विश्व मार्यम का संदेश लेकर दुनिया के देशों में गए और सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निरामया को चरितार्थ किया।

मुख्य अतिथि मायाराम साहू पार्षद ने कहा जिनका गुरु नहीं उनका जीवन शुरू नहीं,राक्षसों को भी गुरु की आवश्यकता थी शुक्राचार्य राक्षसों के गुरु हुए देवताओं के गुरु बृहस्पति हुवे हम तो मनुष्य हैं हमको भी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए गुरु की आवश्यकता है। जो लोग गुरु की आज्ञा का पालन करते हैं और गुरु के बताएं मार्ग पर चलते हैं वे जीवन में सफल होते हैं, श्रीमती कृति बया शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा अपने जीवन मे प्रथम गुर का स्थान माता को ही प्राप्त है क्यों कि माँ ही हमे सबसे पहले सब कुछ सिखाती है बोलना चलना भोजन करना सहित संस्कार देती है,बेनीराम साहू शिक्षक ने कहा पिता जो जीवन जीने के लिये हमेशा संरक्षक और पालक की भूमिका में रहते हैं, फिर आचार्य शिक्षक जिनसे हम शिक्षा प्राप्त कर जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं विद्यार्थी जो अपने गुरुओं से शिक्षा प्राप्त कर उसे अपने जीवन में उतार कर मानव जीवन का उद्धार करते हैं ऐसे अपने गुरुओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करने का यह शुभ पर्व गुरु पूर्णिमा उत्सव है जिसे संपूर्ण भारतवासी मानते हैं, गुरु पूर्णिमा उत्सव कार्यक्रम का संचालन करते हुए कुम्भज सिंह कश्यप शिक्षक ने प्राचीन गौरवशाली भारत के इतिहास की जानकारी देते हुए अपने धर्म ग्रंथो की महानता बताएं, श्रीमती एकता शर्मा सुश्री योगिता साहू ईश्वरलाल साहू शिक्षको ने गुरु पूर्णिमा उत्सव पर अपने विचार रखे।
