क्या केन्द्र की भाजपा सरकार अवैध है ?

नहीं किया गया आवश्यक संसदीय नियमों का पालन।

प्रमोद दुबे 

महासमुन्द – आरटीआई कार्यकर्ता तथा पूर्व पार्षद पंकज साहू ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री श्री मोदी पर संसदीय परम्पराओं का पालन न करने का आरोप लगाते हुये कहा है कि संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री वही हो सकता है, जो लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के संसदीय दल का नेता हो, जबकि इस बार नरेंद्र मोदी को भाजपा के चुने हुए सांसदों ने अपने संसदीय दल का नेता तो चुना ही नहीं, अतः वैधानिक दृष्टि से यह सरकार पूरी तरह अवैध है, साथ ही राष्ट्रपति ने भी पूर्व स्थापित परिपाठी का पालन नहीं किया कि यह सरकार लोकसभा में अमुक दिनों के भीतर अपना बहुमत सिद्ध करे। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक के राजनैतिक सम्पादक केपी मलिक के अनुसार संघ चाहता था कि मोदी के अलावा भाजपा का कोई और नेता प्रधानमंत्री बने। इसके लिए भाजपा संसदीय दल की बैठक में किसी और को नेता चुनने की योजना बनाई गई थी जबकि मोदी-शाह ने बड़ी चाल चलते हुए भाजपा संसदीय दल की बैठक ही नहीं होने दी। उन्होंने सीधे एनडीए की ही बैठक बुला ली, उसमें भी भाजपा सांसदों के अलावा पार्टी के मुख्यमंत्री और अन्य नेता घुसा दिए गए।

श्री मोदी ने अपने आप को नेता चुनने का प्रस्ताव पास करवा लिया परंतु भाजपा के सांसदों ने उन्हें अपना नेता वास्तव में चुना या नहीं, ये किसी को पता नहीं चला, जबकि साल 2014, 2019 में मोदी भाजपा के संसदीय दल के नेता चुने गए थे, एनडीए के नहीं, परन्तु इस बार ऐसा क्यों नहीं हुआ। राजनीतिक दल केवल अपने-अपने संसदीय दलों इलों के नेता ही चुन सकते हैं और दूसरी पार्टी को केवल समर्थन दे सकते हैं, जबकि यहाँ एनडीए नेताओं के अलावा सूबों के मुख्यमंत्री भी शामिल थे। इस राजनैतिक घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिये।