मुहर्रम के अवसर पर प्रतापपुर में मुस्लिम समुदाय द्वारा भव्य रैली निकाली गई।

प्रतापपुर :- पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम के अवसर पर भव्य रैली निकाली गई। सुंदर-सुंदर ताजियों के साथ परंपरा के अनुसार पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी मुस्लिम समुदाय द्वारा डीजे पर चलते हुई मोहर्रम के गीतों के साथ बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुषों द्वारा प्रतापपुर मध्य नगरी से होते हुए कादंबिनी चौक कदम पारा जहां पर ताजियों को विराम देते हैं कुछ समय के लिए तत्पश्चात देर रात धीरे-धीरे गम के माहौल में सभी अपने अपने घरों पर चले जाते हैं।
परंतु इस वर्ष भाईचारे का एक अनोखा उदाहरण देखने को मिला जब रैली मध्य नगरी से गुजर रही थी तो कंचन ज्वेलर्स के पास नगर पंचायत अध्यक्ष कंचन सोनी जी द्वारा जलपान की विशेष व्यवस्था की गई थी। यह काफी सराहनीय कार्य हुआ जिसकी चर्चा सभी वर्ग के लोगों के जुबानो पर थी। इस प्रकार के कार्य अनेकता में एकता को बढ़ावा देती है। पूरे देश के लिए एक मिशाल स्वरूप है।

मुहर्रम के बारे में कुछ जानकारियां दरअसल मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक साल का पहला महीना है, इसी महीने के साथ इस्लामिक साल की शुरुआत होती है, वैसे तो ये एक महीना है लेकिन इस महीने में मुसलमान खास तौर पर शिया मुसलमान पैगंबर मोहम्मद की नवासे की शहादत का गम मनाते हैं। सन 61 हिजरी 680 ईस्वी, में इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों के साथ शहीद कर दिया गया था। मुहर्रम में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का गम मनाते हैं. गिरिया रोना, करते हैं. क्योंकि इस महीने में पैगंबर के नवासे की शहादत हुई थी, इसीलिए इस महीने को गम का महीना कहा जाता है। मुहर्रम में शिया मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करते हैं. उनका गम मनाने के लिए मजलिसें कथा, करते हैं, मजलिसों में इमाम हुसैन की शहादत बयान की जाती है, मजलिस में तकरीर स्पीच, करने के लिए ईरान से भी आलिम धर्मगुरू, आते हैं और जिस इंसानियत के पैगाम के लिए इमाम हुसैन ने शहादत दी थी उसके बारे में लोगों को बताते हैं।