
चरबत्ता गोठ ह चलत रिहिस,गांव के चौपाल म|
सब झन संसो करत रहय,अपन गांव के हाल म||
तर्रा ह पूछे तर्री ल,तुंहर गांव के का हाल चाल हे|
तर्री कहे का बतांव तर्राहा,भइगे हो बारा हाल हे||
नल-जल के पानी संगी,गली-गली म बोहावत हे|
पंचायत राज म पंच सरपंच,मनमाने भोगावत हे||
अतका ल सुन के पथर्रा ह,पथर्री ल पूछत हावय|
तुंहर गांव के मनखे के,कइसन के सुनता हावय||
पथर्री कहे नियाव करैया ह,नियाव ल खावत हे|
गरीब बर हे डांर बोरी,खुद ह गली ल दबावत हे||
सेमरा कहे सेमराडीही ल,महंगाई के का हाल हे|
खेती किसानी कैसे हे,करमचारी के का चाल हे||
का बतावंव सेमराहा,डेढ़ सौ रू किलो पताल हे|
करमचारी के बात झन पूछ,रात दिन हड़ताल हे||
अतका ल सुन के दर्री ह,दर्रा ल पुछत हे सवाल|
ते बता न नोनी बाबू के, तुंहर डाहर हे का हाल||
नोनी बाबू ल का बतावंव,अलकरहा वोकर चाल|
उठवा कुरता डूठुवा पैंट,कुकरा पांखी कस बाल||
भारी दुख मनावत हावय,आज देख तो तर्री-तर्रा |
अपने मुड़ धर के रोवत हावय,पथर्री अऊ पथर्रा ||
सेमराडीही ल सेमरा ह भुल्वारे,झन कर उत्ताधुर्रा|
जियादा संसो झन कर बैरी,दर्री ल काहत हे दर्रा||
रचनाकार:-श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद
