मोदी जी प्रधानमंत्री के रूप में आये या भाजपा प्रवक्ता बनकर:-जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर।

आनंद भोई

महासमुंद :- भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले दिनों 7 जुलाई को छत्तीसगढ़ की रायपुर में आकर 7600 करोड़ रुपये की लागत वाली केंद्रीय परियोजनाओं का बतौर प्रधानमंत्री उदघाटन किया जिसका राज्य की जनता ने स्वागत किया और उनके स्वागत में राज्य के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री मौजूद रहे।

परंतु प्रधानमंत्री की राज्य सरकार को लेकर दिए गए भाषण भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष, प्रवक्ता अथवा विपक्षी नेता के तौर पर रहा जो प्रधानमंत्री पद की गरिमा के विपरीत रहा । ऐसा लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के पास एक ही नेता रह गया है और वह केवल नरेन्द्र मोदी जी है क्योंकि केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं इससे पहले जितने भी राज्यों में वे गए हैं वहां के राज्य सरकार के संदर्भ में संबोधन प्रधानमंत्री पद के विपरीत ही रहा है। राज्य में प्रधानमंत्री के दौरे और उनके उदबोधन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महासमुंद जिला पंचायत सदस्य व किसान नेता जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री के आने से राज्य की जनता में खासकर किसानों को बड़ी आशा थी कि जब छत्तीसगढ़ सरकार धान की कीमत केन्द्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक दे सकता है तो केन्द्र सरकार को चाहिए था कि वह सभी फसलों की पूरे साल भर न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीदी हो इसके लिए कानूनी गारंटी दे। परन्तु इसके ऊपर वे चुप रहे। दूसरी बात यह कि राज्य में यात्री ट्रेनें पांच पांच छै छै घंटे देरी से चल रही है उसे कैसे समय पर निर्धारित किया जाये चुप रहे। मोदी जी ने अपने पहले कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाने की बजट में घोषणा किया था दूसरा कार्यकाल भी समापन की ओर है परंतु धरातल में कुछ दिखाई नहीं दे रहा है और तो और भू जल स्तर नीचे जा रही है उसे कैसे संरक्षित किया जाए इस पर भी कोई बात नहीं है। जब पेट्रोल का दाम 70 रुपये प्रति लीटर थी तब मोदी जी ने महंगाई की मार बताया था आज 100 रुपये प्रति लीटर से पार हो चुकी है पेट्रोलियम पदार्थों की दामों में वृद्धि के साथ साथ आवश्यक वस्तुओं की महंगाई ने आम जनता का कमर तोड़ दिया है इस बात पर मौनी बाबा बने रहे। प्रत्येक वर्ष एक करोड़ बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की वायदा किया था वह मुकर गए हैं। एक समय था जब निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था परंतु आज देश के शिक्षण संस्थानों, बैंक, बीमा, रेलवे जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों को जहां पर सुरक्षित रोजगार के अवसर थे उन्हें निजी हाथों में बेचकर कॉरपोरेट जगत का सेवादार बना हुआ है। छत्तीसगढ़ सरकार चावल से एथेनॉल बनाने की अनुमति चाह रहे हैं ताकि किसानों से रबी फसल धान भी समर्थन मूल्य पर खरीद सके व भारतीय खाद्य निगम के भरोसे न रहे। भारतीय खाद्य निगम भारत सरकार के अधीन है लेकिन चावल जमा करने वाले राईस मिलर से रिश्वत ली जाती है जिसकी शिकायत एशोसिएशन द्वारा केन्द्रीय खाद्य मंत्री से की गई है इस पर भी चुप रहे। विपक्षी पार्टी के सरकार को कोसने का काम उनके पार्टी अध्यक्षों या अन्य नेताओं का काम है प्रधानमंत्री को चाहिए था कि राज्य का कैसे विकास हो सकता है और इसके लिए राज्य सरकार को कितना ज्यादा मदद हो सकता है तथा कितना मदद किया जा रहा है इस पर ही अपनी बात बतौर प्रधानमंत्री रखनी चाहिए थी न कि भाजपा प्रवक्ता की तरह।