
राजिम :- प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ऐसी कई प्रतिभाएं हैं जिन्हें उचित अवसर प्राप्त हो तो वह अपनी कला के माध्यम से स्वयं को प्रस्तुत कर पाने में सफल हो सकते हैं ऐसे ही कोमा राजिम की माटी में पले बढ़े लोक कला के क्षेत्र में लगातार एक से बढ़कर एक मुकाम तय कर रहे लोक कला के उपासक कलाकार तुलाराम साहू है। जिन्होंने बचपन से अपने भीतर छिपे कलाकार को कला की कसौटी बांधकर उन्हें परिपक्वता प्रदान की। वर्तमान में तुलाराम साहू श्रीराम संगीत कला केंद्र राजिम के संचालक है। कहा जाता है कि जहां चाह होती है वहां राह निकल ही जाता है। तुलाराम साहू ने बचपन से ही अपनी कला को निखारने के लिए जो मेहनत किया वह उनकी कला के प्रति समर्पण और लगाव ही था जिसने उन्हें सफलता के कई सोपान तय करने के सहायक सिद्ध हुए। बता देना जरूरी है कि राजिम क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ उनके कला के मुरीद है। उन्होंने नामचीन कलाकारों के साथ प्रस्तुति भी दी है।
संगीत निर्देशन करने में माहिर
तुलाराम साहू ने दाई माटी के दुनिया बनाएं, विश्वकर्मा बाबा तोला परनाम हे, होली रास गीत, मड़ई हमर गांव जैसे कई गानों में संगीत निर्देशन का कार्य किया हैं जो यूट्यूब में उपलब्ध है जिन्हें दर्शकों ने काफी पसंद भी किया है। वर्ष 2007 से 2017 तक सरस्वती शिशु मंदिर राजिम में आचार्य के पद में अपनी सेवा दे चुके हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से तुलाराम साहू ने बीए ऑनर्स की डिग्री व द्विवर्षीय लोक संगीत डिप्लोमा और लोक संगीत में एम ए की डिग्री प्राप्त की है।
हजार से भी ज्यादा लोगों को किया संगीत में पारंगत
श्रीराम संगीत कला केंद्र राजिम के माध्यम से तुलाराम साहू ने हजारों लोगों को तबला, हारमोनियम, केसियो, ऑक्टोपेड, आर्गन, ढोलक जैसे विधाओं में संगीत की शिक्षा प्रदान कर चुके हैं जो अभी समाज में संगीत के क्षेत्र में अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। सन् 2007 में संगीत कला केंद्र की स्थापना किया गया। तब से लेकर अनवरत अभी तक संचालित है। विलुप्त हो रहे लोक कला व संस्कृति को बचाने के कई प्रयास किए, उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला व संस्कृति जो अभी के पाश्चात्य परिवेश में विलुप्त होने के कगार में है उसको बचाने के लिए संगीत केन्द्र में प्रत्येक शनिवार को संगीत सभा का आयोजन यह जाता है जिसमें केवल छत्तीसगढ़ की लोकगीतो की प्रस्तुति हुईं, इसमें अंचल के कलाप्रेमी बढ़-चढ़कर के सम्मिलित हुए। श्री साहू ने एक प्रश्न के जवाब में बताया कि संगीत ईश्वर का वरदान है इनको प्राप्त करने के लिए कठिन साधना करनी पड़ती है। लोक मंच तक पहुंचने में कलाकार को ढेरों परीक्षाएं पास करनी पड़ती है तब कहीं कलाकार मंच में टिक पाता है। उन्होंने बताया कि राजिम क्षेत्र प्राचीन काल से लोक कला लोक संस्कृति को विरासत के रूप में संजोकर रखे हुए हैं।
