प्रयाग नगरी के शिव मंदिरों में गूंज रही वेद ध्वनि l 

राजिम :- धर्म नगरी में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है सावन लगते ही शिव मंदिरों में घंटियों की झंकार के अलावा जल अभिषेक के लिए श्रद्धालु उमड़ी हैं। वहीं वेद ध्वनि भी हो रही है। शिवजी के पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय एवं महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण श्रद्धा को प्रगाढ़ कर रही है। उल्लेखनीय है कि भगवान राजीव लोचन मंदिर के सामने द्वितीय परिसर में स्वयंभू शिवलिंग राज राजेश्वर नाथ महादेव का मंदिर है। भगवान राजीव लोचन मंदिर से सीधे दक्षिण दिशा की ओर शिवलिंग का दर्शन होता है। बनाने वाले कारीगरों ने शानदार उदाहरण प्रस्तुत करते हुए हरि और हर दोनों की प्रतिमा को एक सीध में लाकर एक साथ दोनों का दर्शन कराते हैं। मंदिर के गर्भगृह में शिव जी अपने रूद्र परिवार के साथ विराजमान है मध्य भाग में शिवलिंग तकरीबन डेढ़ फीट की ऊंचाई पर गोलाकार है। नीचे वेदी पर जल हरि रूप में मां पार्वती का स्वरूप है। अर्धनारीश्वर भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग हमेशा फूल पत्ती एवं अक्षत, द्रव्य, शक्कर, बिल्वपत्र इत्यादि से ढका हुआ है। शेषनाग फन फैलाकर शिवलिंग को ढके हुए हैं। प्रतिदिन दिव्य शिवलिंग की पूजा अर्चना करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालु उपस्थित हो जाते हैं। गुरुवार को बरसते पानी के बावजूद भक्तगण मंदिर में पहुंच रहे थे और जलाभिषेक कर रहे थे। बताना होगा कि ऐसी मंदिर के दाएं और दान दानेश्वर महादेव का मंदिर है।

नदी के मध्य में है कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर

संगम नदी के मध्य में विश्व विख्यात पंचमुखी कुलेश्वर नाथ महादेव का विशाल मंदिर प्राचीन काल से स्थित है। बताया जाता है कि त्रेता युग में देवी सीता ने अपने हाथों से बालू के द्वारा शिवलिंग का निर्माण किया। वह त्रिवेणी संगम में स्नान पश्चात शिवलिंग बनाकर जल अभिषेक भी किया। तब से यह शिवलिंग अपनी स्थान पर अभी भी मौजूद है। पूरी दुनिया में द्वादश शिवलिंग, 108 दिव्य लिंग तथा 275 पवित्र शिवलिंग की जिक्र होता है। इस ज्योतिर्लिंग की दर्शन करने के लिए दुनिया भर से लोग बड़ी संख्या में आते रहते हैं। सुबह-शाम पूजन आरती से माहौल भक्ति में हो जाता है। महादेव मंदिर के चौराहे पर एक बड़ा सा पीपल का वृक्ष है जिसे 600 वर्ष पुराना बताया जाता है। अब तो वर्षा काल में भी मंदिर तक पहुंचने के लिए लक्ष्मण झूला का निर्माण किया जा चुका है।

नाथों के नाथ बाबा गरीब नाथ का मंदिर रानी धर्मशाला में

बाबा गरीब नाथ का मंदिर देवी श्याम कुमारी धर्मशाला से लगा हुआ है। इन्हें स्वयंभू शिवलिंग माना गया है। जानकारी के आधार पर फिंगेश्वर स्टेट की रानी श्याम कुमारी रायपुर जाने के लिए इस स्तर पर रुकी हुई थी तभी उनको पता चला कि यहां शिवलिंग मौजूद है। उन्होंने पूजा अर्चना की और मंदिर बनाने का आदेश दे दिया। कालांतर में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और आज विशाल रूप में मंदिर निर्मित है गर्भ गृह महा मंडप से नीचे है जहां बाबा गरीब नाथ का शिवलिंग मौजूद है।

ब्रह्मचार्य आश्रम में सोमेश्वर नाथ महादेव का मंदिर

ब्रह्मचर्य आश्रम में सोमेश्वर नाथ महादेव का मंदिर है इस मंदिर में बाबा सोमेश्वर नाथ महादेव का अर्धनारीश्वर शिवलिंग है जहां प्रतिदिन पूजा अर्चना से माहौल भक्तिमय रहता है। बताया जाता है कि राजा सोम ने यहां सोम यज्ञ करवाया था। इस स्थल की एक प्राचीन मान्यता है की नदी से लगा हुआ सोन तीर्थ घाट है जहां स्नान करने से सोना दान करने के बराबर फल मिलता है। सोमेश्वर नाथ महादेव के सामने एक विशाल वृक्ष की जड़ से लगा हुआ शिवलिंग है जो प्रतिदिन आपने ऊंचाई को बढ़ा रही है। इससे लोगों की श्रद्धा भक्ति बढ़ गई है। इसी तरह से यहां महादेव के अनेक शिवलिंग मौजूद है जो श्रद्धा भक्ति एवं विश्वास की परिणिति है।