जब सारे तबादले मुख्यमंत्री करते हैं तो।

भोपाल-अवधेश पुरोहित

भोपाल :- पिछले दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के श्रीमुख से उजागर किया कि कोई मंत्री तबादले में पैसे नहीं लेता है? लेकिन जब इस संबंध में कुछ मंत्रियों से जानकारी ली गई तो उनका कहना है कि आजकल तबादला तो मुख्यमंत्री जी ही करते हैं? सवाल यह उठता है कि जब मुख्यमंत्री तबादला करते हैं तो फिर कौनसा मंत्री पैसा ले रहा है? इसका भी खुलासा मुख्यमंत्री को करना चाहिए हालांकि इस संबंध में जब भाजपा के कुछ लोगों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि हमारे सरकार में भाजपा का चर्चित नारा सबका साथ, सबका विकास के साथ ही कार्य चल रहा है? इसी चर्चित नारे के चलते प्रदेश में कर्मचारियों के तबादले भी होते हैं? जब उनसे यह पूछा गया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि मंत्री तबादले में पैसा नहीं लिया करे, तो वह बोले कि मुख्यमंत्री को चिंता इस बात की नहीं कि मंत्री पैसा क्यों ले रहे हैं? भाजपा के चर्चित नारे के तहत प्रदेश में चल रहे तबादला उद्योग में तबादला करने वाले अधिकारी व कर्मचारी को इतने सारे लोगों के दर पर भटक कर और उन्हें चढ़ोतरी चढ़ाकर तबादला करवाने की मशक्कत करनी पड़ती है जिससे दुख मुख्यमंत्री को इस बात का है कि पैसा एक जगह क्यों नहीं आ रहा है? असल में तबादले के लिये पहले उस आदमी को ढूंढा जाता है जिसके विधायक से संबंध हों, फिर विधायक के पत्र पर आवेदन कर अनुरोध कराया जाता है? इन दोनों की चढ़ोतरी के बाद मामला मंत्री तक पहुंचता है? यहां से उनके मुंह लगे दलालों के माध्यम से सेवा पूजा की जाती है? तब कहीं जाकर मंत्री नोटशीट बनाकर मुख्यमंत्री के पास भेजता है, फिर मुख्यमंत्री उस पर आदेश देते हैं? इतनी जटिल प्रक्रिया के बाद भी जब मुख्यमंत्री के यहां भी किसी न किसी की गणेश पूजा करनी पड़ती है? असली बात मुख्यमंत्री को इस बात का है? वैसे हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि भ्रष्टाचार से लोकतंत्र को खतरा है? लेकिन हमारे मध्यप्रदेश में तो भ्रष्टाचार से लोग मालामाल हो रहे हैं? इसका प्रत्यक्ष उदाहरण भाजपा के नेता व सत्ता के दलालों को शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए उन पर कुबेर की मेहरबानी के नतीजे देखने को मिल रहे हैं ?