रहस नृत्य से गुंजा प्रयाग नगरी।

राजिम :- प्रयाग नगरी राजिम में होलियाना माहौल देखते ही बन रहे हैं जिधर देखो उधर होली की धूम-धड़ाके नगाड़े बज रहे हैं तो कहीं पर रहस नृत्य की छटा देखने मिल रही हैं और कहीं पर रंग गुलाल से होली पर्व का शानदार स्वागत कर रहे हैं। सोमवार को रात्रि 2:00 से 3:00 के बीच में होली जलने के बाद जैसे ही अखबारों में छपी उसके बाद तो त्योहारी सीजन भी जोरदार उछाल देखा गया। पिचकारी दुकानों पर खासतौर से भीड़ जमा रहा। अन्य दुकानों में भी खरीदारी होते रहे। दीगर दिनों की अपेक्षा सोमवार को अच्छी खासी खरीदारी हुई। पिचकारी की दुकानों में कोई छोटे पिचकारी तो कोई बड़े पिचकारी खरीदते रहे और इसमें खासतौर से छोटे बच्चे अपने मनपसंद के रंग गुलाल के अलावा पॉलीथिन भी खरीदें। बताया गया कि रंग को पॉलिथीन में डालेंगे उसके बाद उसे फेंककर रंग का छिड़कन करेंगे। आज दोपहर बाद रहस नृत्य टोली शानदार प्रस्तुति दे रहे थे। शहर से 18 किलोमीटर दूर स्थित गांव पंक्तियां के इन कलाकारों ने मांदर की थाप पर थिरकते रहे। कोई राधा तो कोई कृष्ण तो कोई सका वालों वालों का वेशभूषा लगाए हुए थे उनके साथ में वाद के पक्ष के कलाकार शानदार धुन छेड़ रहे थे। जैसे ही यह टोलियां बस स्टैंड के पास पहुंची। देखने वालों की भीड़ जमा हो गई और डंडा लेकर नृत्य भी किया जो आकर्षण का केंद्र बने रहे। खरीदारी खूब रही लेकिन बाजार से नदारद रहे बतासा के माला पुरातन काल से होली पर बतासा के माला पहनने और उस मिठाई को खाने का रिवाज रहा है लेकिन इस बार होटल एवं मिठाई की दुकान से बतासे की माला नदारद दिखे। ज्यादातर एक दो दुकानों को छोड़कर कहीं पर भी यह माला नहीं दिखे। चर्चा करने पर बताया गया कि अब इन्हें खरीदने वाले कम हो गए हैं जिसके कारण यह माला हम नहीं रखते हैं। फिर भी गांव में आज भी छोटे बच्चे यह बतासे की माला पहन कर त्यौहार को एक्सेप्ट करते हैं। छोटे बच्चे सड़क पर रस्सी लगाकर मांगते रहे चंदा आज भी छोटे-छोटे स्कूली बच्चे रस्सी लगाकर सड़कों पर चंदा मांगते हुए दिखे और लोग उन्हें ₹1 से लेकर ₹10 तब भी देते रहे। इन बच्चों ने बताया कि इस राशि से हम गुलाल खरीदेंगे तथा पिचकारी भी खरीदेंगे। लोग यह तरकीब लगाते रहे कि परीक्षा के वक्त दी बच्चे त्यौहारी रंग में रंगे हुए हैं वैसे भी हिंदुस्तान के सभी त्यौहार लोगों को अपने रंग में रंग लेते हैं। दुकानों में हुई जमकर खरीददारी, दुकानों में इस बार जमकर खरीदारी देखी गई। रंग गुलाल की दुकान सजे हुए थे इस बार गुलाल की कीमत बढ़ी हुई है इनके अलावा पिचका व अन्य सामानों की भी कीमत में बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण लोग अपनी हैसियत के मुताबिक इन्हें खरीदते रहे। शराब भट्टी बंद होने से पहले किया जुगाड़, शराब भट्टी बंद होने से पहले लोगों ने अपने पीने की जुगाड़ दिन भर करते रहे ताकि शराब की कहीं कमी ना हो। इस बार मदिरालय में बड़ी भीड़ रही। पीने वालों की रंगत अभी से देखने को मिल रही है आज शाम को लोग तेज रफ्तार बाइक भी चला रहे थे इससे अन्य लोग डर रहे थे।

शांति समिति की बैठक हुई की नहीं पता नहीं, इस बार शांति समिति की बैठक हुई कि नहीं नगर के ही लोगों को पता नहीं है कुछ लोग बता रहे थे कि बैठक हो गई है लेकिन यहां के प्रतिष्ठित लोग इस बैठक से अनजान है यहां तक कि यदि हो भी गई हो तो नगर के पत्रकारों एवं पुराने गणमान्य लोगों की कोई पूछ परख नहीं हुई है। इससे नगर में शांति व्यवस्था पर जोरदार चर्चा हो रही है। प्रत्येक वर्ष बराबर थानेदार साहब शांति व्यवस्था के लिए होली के पूर्व शांति समिति की बैठक बुलाते थे लेकिन इस बार उनकी बेरुखी समझ से बाहर है।