मखाना की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ें धमतरी की महिलाएं

29 अक्टूबर को मखाना की उपज का संग्रह शुरू हुआ, महिला स्व-विषय सहायक को संभावित वैज्ञानिक कटाई-पश्चात प्रबंधन का प्रशिक्षण

औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले, ग्रामीण उद्यमों और महिला उद्यमों के नए अवसरों को जोर से विकसित किया गया.

धमतरी – धमतरी जिले में कृषि विविधता और ग्रामीण कृषकों को मजबूत बनाने की दिशा में खेती में नई फसल पैदा हो रही है। तालाबों में मखाना उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल अब लागू हो गई है। इसी कड़ी में ग्राम चेस्ट और दासरा में महिला स्व-लैंग्वेज 29 ओक क्षेत्र में निर्माताओं द्वारा खाना बनाने का संग्रह शुरू हो गया है। साथ ही, महिलाओं को खाना बनाने और संग्रह करने वालों के प्रबंधन की वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रस्ताव की तैयारी की जा रही है। इससे उपज की क्वालिटी, कंपनी और बाजार में बेहतर कीमत की पेशकश की जाएगी।

केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2025-26 के तहत धमतरी जिले के तालाबों में मखाना की खेती के लिए 165 एकड़ जमीन का लक्ष्य दिया गया था। इसके अंतर्गत जिला प्रशासन एवं उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में 105 ओक क्षेत्र में मखाना की खेती शुरू की गई। ग्राम राखी, छाती, डंडेसरा और पेपरछेड़ी के साथ नगरी विकासखंड के ग्राम सांकरा में भी इस फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ग्राम चेस्ट और डांडेसरा में शैलपुत्री स्व-सहायता समूह और नई किरण स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए 26 अक्टूबर को मखाना संग्रहकर्ताओं की शुरुआत और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर ग्राम चेस्ट-सेंचुवा की सरपंच श्रीमती दानेश्वरी साहूकार, श्री दीपक कुमार साहू, पंचगण, कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ श्रीमती दीपिका कश्यप साहू, उप निदेशक उद्यानिकी श्रीमती पूजा कश्यप साहूकार, उद्यान विकास अधिकारी श्री राहुल साहू और ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्री नायडू प्रसाद भारती अध्याप्ति रह रहे हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में आगामी दिनों में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में महिला उद्यमियों को कृषि विभाग प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में उपज की देखभाल, बैग और गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीक की जानकारी दी जाएगी, इसलिए महिलाओं को इस कार्य को उद्योग और उद्यमिता के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

मखाना की कटिंग के चरण

मखाना की कटिंग मुख्य रूप से तीन चरणों में होती है। पहली कटिंग को लहसर कहा जाता है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत मखाना निकाला गया। इस काम के लिए माउंटेन को सामान्यतः प्रति रिज़ॉर्ट के आधार पर बनाया जाता है। इसके बाद दूसरी और तीसरी कटिंग मार्कट और कर्कट कहलाती है। इन चरणों में लगभग 30 प्रतिशत बीज मिलते हैं, जिसके लिए अधिक मेहनत और समय की आवश्यकता होती है।

काटने की बाद की प्रक्रिया

तालाब से बीज निकालने के बाद उनकी अच्छी तरह से सफाई की जाती है। काले कणों को धोकर लगभग 2 से 30 दिन तक तेज धूप में सुखाया जाता है, ताकि उनका सिद्धांत कम हो सके। इसके बाद मसाले को चटनी या मिट्टी की चटनी में अलग-अलग तरह से मिलाया जाता है। इसके अलावा लकड़ी की थापी से लेकर बीज तक को फोड़ा किया जाता है। इस प्रक्रिया से बीज के अंदर का सफेद और कुरकुरा मखाना का बाहरी भाग निकलता है, जिसे स्थानीय रूप से लावा कहा जाता है।

कलेक्टर  अविनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री और स्थानीय स्तर पर राज्य स्तरीय कृषि के नए क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की सामुहिक व्यवस्था शामिल है। मखाना की खेती, किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ महिला स्व-औद्योगिक विचारधारा को आर्थिक रूप से बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती है। इसके उत्पादन के लिए वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी, कंपनी, गुणवत्ता और बाजार से संबंधित उपकरणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि तकनीकी निर्देशन एवं प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी एवं आत्मनिर्भरता उद्योग की दिशा को आगे बढ़ाया जाए।

मखाना उत्पादन का यह पहला कदम धमतरी जिले में पारंपरिक कृषि क्षेत्र के साथ नए विकल्प को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण, गुणवत्ता आधारित उद्यमों और बाजारों में पहले ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, उद्यम और सामूहिक उद्यम के नए अवसर पैदा होंगे।