पीएमएफएमई योजना से मिली 27 लाख की बैंक सहायता से शुरू किया बेकरी व्यवसाय

हुनर को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भर बनीं रेनू प्रसाद

महासमुंद – प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा देश के हर वर्ग को आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के संकल्प की प्रेरक यात्रा रही है। इसी संकल्प को साकार करने में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। महासमुंद जिले की श्रीमती रेनू प्रसाद की सफलता की कहानी इसी बदलाव की एक मिसाल है, उन्होंने अपने हुनर और मेहनत को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भर उद्यमी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
श्रीमती रेनू प्रसाद को शुरू से ही बेकरी उत्पाद बनाने के कार्य में विशेष रुचि थी। बेकिंग के प्रति उनके इसी जुनून ने उन्हें अपने हुनर को स्वरोजगार का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बेकरी उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण प्राप्त कर बेकिंग की बारीकियां सीखी और अपने कौशल को व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने का निर्णय लिया। व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की जरूरत थी। इसी दौरान उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, महासमुंद के माध्यम से के केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी मिली। योजना से प्रेरित होकर उन्होंने ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया तथा आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति की। जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र द्वारा उनका प्रकरण भारतीय स्टेट बैंक, बोकारो को प्रेषित किया गया। बैंक द्वारा उनके व्यवसाय के लिए 27 लाख की राशि स्वीकृत एवं वितरित की गई। योजना के माध्यम से प्राप्त वित्तीय सहायता से रेनू प्रसाद ने आवश्यक मशीनरी एवं उपकरण खरीदे और अपने बेकरी व्यवसाय की शुरुआत की। आज वे अपने पसंद के कार्य को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
रेनू प्रसाद बताती हैं कि पीएमएफएमई योजना ने उनके सपने को साकार करने में विशेष भूमिका निभाई है। पहले जो हुनर उनके लिए केवल रुचि का विषय था, वही आज उनके व्यवसाय की पहचान बन रहा है। वे अपने बेकरी व्यवसाय को लगातार आगे बढ़ाने और उत्पादन को विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं। रेनू प्रसाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि योजना से मिली सहायता ने उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनने और अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाया है।