50 जमीनी भाजपा कार्यकर्ताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ, जिलाध्यक्ष की अनदेखी से नाराजगी की चर्चा
बीजापुर – उपमुख्यमंत्री अरुण साव के कल बीजापुर दौरे से ठीक एक दिन पहले जिले की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, भाजपा के करीब 50 समर्पित एवं जमीनी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इन कार्यकर्ताओं ने विधायक विक्रम मंडावी के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
बताया जा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के कांग्रेस प्रवेश के पीछे भाजपा जिलाध्यक्ष की कार्यशैली और लगातार हो रही कथित अनदेखी से नाराजगी प्रमुख वजह बताई जा रही है। कांग्रेस की रीति-नीति और विधायक विक्रम मंडावी के जनकल्याणकारी कार्यों से प्रभावित होकर इन कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में शामिल होने की बात सामने आ रही है।
संगठन मजबूत करने की कवायद के बीच 50 कार्यकर्ताओं का कांग्रेस प्रवेश
खास बात यह है कि प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री पवन साय द्वारा लगातार बीजापुर के दौरे कर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कवायद के बीच करीब 50 भाजपा समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में जाना संगठन के लिए गंभीर राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने प्रदेश भाजपा संगठन से लेकर जिला संगठन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद चल रही है, तब जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता पार्टी से दूरी क्यों बना रहे हैं?
अगली कड़ी में बड़े चेहरों के भी दूरी बनाने की चर्चा
वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि भाजपा में नाराजगी का यह सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। पार्टी के कुछ बड़े एवं प्रभावशाली चेहरे भी लगातार हो रही कथित अनदेखी और नाराजगी के चलते आने वाले समय में भाजपा संगठन से दूरी बना सकते हैं.
हालांकि, बड़े चेहरों को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंदरूनी हलकों में चल रही चर्चाओं ने भाजपा संगठन की चिंता बढ़ा दी है.
अरुण साव के दौरे से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उपमुख्यमंत्री अरुण साव के बीजापुर दौरे से ठीक पहले हुए इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने जिले की सियासत को गरमा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 50 जमीनी कार्यकर्ताओं के कांग्रेस प्रवेश के बाद भाजपा संगठन डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाता है?
आने वाले दिनों में यदि नाराज भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का कांग्रेस की ओर रुख जारी रहता है, तो इसे बीजापुर में भाजपा संगठन के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।
अब निगाहें उन संभावित बड़े चेहरों पर टिकी हैं, जिनके भी पार्टी छोड़ने की चर्चाएं सियासी गलियारों में तेज हैं.
