BRO परियोजना की आड़ में पहाड़ों पर ब्लास्टिंग कर करोड़ों की गिट्टी बनाने के आरोप, वन विभाग और खनिज विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
बिना अनुमति एक साल तक कथित रूप से चलता रहा क्रेशर, अब व्हाट्सएप पर भेजी जा रही गिट्टी की रेट लिस्ट, स्थानीय ठेकेदारों से सप्लाई के संपर्क का दावा
ईश्वर सोनी बीजापुर/सुकमा
BRO (बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन) की सड़क परियोजना की आड़ में कथित अवैध खनन और क्रेशर संचालन का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले वन भूमि पर पहाड़ों की खुदाई और बिना अनुमति क्रेशर संचालन के आरोप सामने आए, अब पूरे मामले में विस्फोटकों के इस्तेमाल, वन विभाग, खनिज विभाग और प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एक वर्ष से अधिक समय तक वन भूमि पर कथित रूप से बड़े पैमाने पर पत्थरों का उत्खनन कर गिट्टी तैयार की गई। इसके लिए भारी-भरकम पोकलेन, ड्रिलिंग मशीन और अन्य उपकरणों का उपयोग किया गया। सवाल यह है कि यदि संचालन नियमों के अनुरूप नहीं था, तो इतना बड़ा काम प्रशासन और संबंधित विभागों की नजर से कैसे ओझल रहा?
*सबसे बड़ा सवाल – क्रेशर अवैध तो बारूद किसकी अनुमति से फूटा?*
मामले का सबसे अहम पहलू अब विस्फोटकों के उपयोग को लेकर सामने आया है। पहाड़ों को तोड़ने के लिए बारूद का इस्तेमाल बिना निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति के नहीं किया जा सकता। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि यदि क्रेशर और खनन वैध अनुमति के बिना चल रहे थे, तो ब्लास्टिंग की स्वीकृति किस विभाग ने दी?
विस्फोटकों के भंडारण, परिवहन और उपयोग का रिकॉर्ड किसके पास है? क्या संबंधित एजेंसियों से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं? अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
*वन विभाग पर भी उठे सवाल*
आरोप है कि वन भूमि पर बड़े पैमाने पर पहाड़ों की कटाई और पत्थरों का उत्खनन किया गया। यदि ऐसा हुआ, तो वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर जंगल के भीतर भारी मशीनों की आवाजाही, ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग जैसे कार्य लंबे समय तक कैसे चलते रहे? क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, या जानकारी के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई?
*एक खनिज अधिकारी, दो जिले… संयोग या व्यवस्था की कमजोरी? , अवैध क्रेशर पर अब तक कार्यवाही नही अधिकारी की साठगांठ य्या कार्यवाही नही करने का दबाव?*
बीजापुर और सुकमा दोनों जिलों का प्रभार एक ही खनिज अधिकारी के पास होने के कारण भी चर्चा तेज हो गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभागीय नियमों की अनदेखी कर कथित रूप से पूरे मामले में मौन सहमति बनी रही। यदि समय रहते निरीक्षण और कार्रवाई होती, तो क्या यह मामला इतना बड़ा रूप लेता?
*अब व्हाट्सएप पर रेट लिस्ट, स्थानीय सप्लाई की तैयारी?*
बीआरओ के नाम का इस्तेमाल कर अवैध गिटटी उत्खनन कर बाजार में बेचने के लिए व्हाट्सअप पर रेट लिस्ट भेजा जा रहा है
सूत्रों के अनुसार, कथित क्रेशर से जुड़े लोगों द्वारा स्थानीय ठेकेदारों से संपर्क किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि जगदलपुर के बाजार भाव के आधार पर गिट्टी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए व्हाट्सएप पर रेट लिस्ट भी भेजे जाने की चर्चा है। यदि यह सही है, तो सवाल यह भी उठता है कि BRO परियोजना के लिए तैयार की गई सामग्री अन्य निर्माण कार्यों तक कैसे पहुंच रही है।
*’फ्री का पहाड़’, करोड़ों का कारोबार?*
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि प्राकृतिक संसाधनों से निकाली गई गिट्टी की आपूर्ति बिना वैध फिटपास के की गई। साथ ही यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि अधूरे दस्तावेजों के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।
*BRO का नाम इस्तेमाल कर खनिज माफियो का बढ़ता कारोबार ?*
सूत्रों का दावा है कि BRO परियोजना में सप्लाई का हवाला देकर संबंधित लोगों ने आसपास की कई सड़क निर्माण परियोजनाओं में भी अपनी पैठ बनाने का प्रयास किया। स्थानीय ठेकेदारों से संपर्क कर गिट्टी की सप्लाई का प्रस्ताव दिए जाने की भी चर्चा है।
*अब इन सवालों के जवाब कौन देगा?*
◆ यदि क्रेशर वैध नहीं था, तो बारूद और विस्फोट की अनुमति किसने दी?
◆ वन भूमि पर पहाड़ों की खुदाई की अनुमति किस विभाग ने जारी की?
◆ ब्लास्टिंग में प्रयुक्त विस्फोटकों का रिकॉर्ड किसके पास है?
◆ एक वर्ष तक कथित अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
◆ यदि दस्तावेज अधूरे थे, तो करोड़ों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया?
◆ व्हाट्सएप पर कथित रेट लिस्ट भेजकर गिट्टी बेचने का दावा किस अधिकार से किया जा रहा है?
◆ क्या पूरे मामले की संयुक्त जांच होगी या जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर मामला दबा दिया जाएगा?
अब सुकमा एंव बीजापुर के प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
पूरे मामले को लेकर अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन, वन विभाग, खनिज विभाग और BRO के आधिकारिक पक्ष पर हैं।
यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन संपदा, सरकारी राजस्व, विस्फोटक नियमों और परियोजना निगरानी व्यवस्था से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करेगा।
*पूरे मामले को लेकर क्या कहते है खनिज अधिकारी*
खनिज अधिकारी छबीलेश्वर मौर्य ने कहा कि सुकमा का क्रेशर प्लान्ट अवैध है अनुमति नही हुई है एंव अब तक किये गए विस्फोट की कोई जानकारी उपलब्ध नही है वन्ही बीजापुर के तररेम में संचालित क्रेशर को वैध बताते हुए एक साल पहले ही परमिशन हो चुका है बताया जबकि महज एक महीने पहले विभाग से मिली जानकारी में तररेम में संचालित क्रेशर का कोई जिक्र नही है.
