स्थान – भंडार छत्तीशगढ़
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, छत्तीसगढ़ इस निर्णय को सिरे से खारिज करता है। संगठन का मानना है कि डिजिटलाइजेशन का स्वागत है, लेकिन डिजिटलाइजेशन के नाम पर तकनीकी खामियों से जूझ रहे कर्मचारियों का वेतन काटना शासन की हठधर्मिता और अव्यवहारिक सोच को दर्शाता है।
VSK ऐप की जमीनी हकीकत क्या है?
पिछले 1 वर्ष से प्रदेश भर के शिक्षक VSK ऐप की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। संगठन द्वारा पूरे प्रदेश में जुटाए गए जानकारी के आधार पर निम्नलिखित प्रमुख खामियां सामने आई हैं:
1. सर्वर ओवरलोड एवं तकनीकी फेलियर: प्रदेश के 52 हजार से अधिक स्कूलों में लगभग 2.5 लाख शिक्षक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से एक साथ उपस्थिति दर्ज करते हैं। इस समय ऐप का सर्वर पूरी तरह से ठप हो जाता है। “Server Error 500”, “Failed to Login” जैसे मैसेज आम हैं। नतीजतन हजारों शिक्षक समय पर उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित दर्शाए जाते हैं।
2. गलत GPS लोकेशन एवं नेटवर्क संकट: छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा, जशपुर जैसे आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों में आज भी 4G नेटवर्क की भारी समस्या है। शिक्षक स्कूल परिसर में मौजूद रहते हैं, लेकिन ऐप 500 मीटर दूर की लोकेशन दिखाकर उपस्थिति दर्ज करने से मना कर देता है। कई बार तो GPS ही काम नहीं करता। क्या इन शिक्षकों की गलती है कि उनके क्षेत्र में नेटवर्क नहीं है?
3. ऐप का हैंग होना और डेटा लॉस: पुराने एंड्रॉयड फोन पर ऐप बार-बार हैंग होता है। कई बार उपस्थिति दर्ज करने के बाद भी वह सर्वर पर अपडेट नहीं होती। शिक्षकों को बार-बार लॉगिन-लॉगआउट करना पड़ रहा है, जिससे उनका शैक्षणिक समय बर्बाद हो रहा है।
4. मैनुअल सिस्टम की पूर्ण उपेक्षा: आज भी हर स्कूल में भौतिक उपस्थिति पंजी संधारित की जाती है, जिसमें संकुल प्राचार्य एवं BEO के हस्ताक्षर होते हैं। यह कानूनी रूप से मान्य दस्तावेज है। लेकिन नए आदेश में इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
यह निर्णय क्यों है अन्यायपूर्ण?
एक शिक्षक सुबह 9 बजे घर से निकलकर 20-30 किमी दूर स्कूल पहुंचता है। वह प्रतिदिन बच्चों को पढ़ाता है, मिड डे मील, परीक्षा, गणवेश, छात्रवृत्ति का काम करता है फिर भी उसकी निष्ठा और मेहनत पर किसी को संदेह किया जाता है। लेकिन एक ऐप की तकनीकी नाकामी की वजह से यदि उसका वेतन काट लिया जाएगा तो यह उसके और उसके परिवार के साथ सरासर अन्याय है।
वित्त विभाग के नियमों में भी कहीं यह नहीं लिखा है कि तकनीकी कारणों से वेतन रोका जा सकता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि “कर्मचारी को उसकी गलती के बिना दंडित नहीं किया जा सकता।”
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
इन सभी तथ्यों के आधार पर *सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, छत्तीसगढ़* शासन से निम्न मांगें करता है:
1. *त्काल स्थगन:* आदेश के बिंदु क्रमांक 3 को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।
2. *वैकल्पिक व्यवस्था:* जब तक VSK ऐप की सभी तकनीकी खामियां दूर नहीं हो जातीं और प्रदेश के हर कोने में 100% नेटवर्क उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक उपस्थिति के लिए भौतिक उपस्थिति पंजी को ही अंतिम साक्ष्य माना जाए।
3. *तकनीकी समस्या के लिए टीम गठित किया जााये:-* VSK ऐप की खामियों की जांच के लिए शिक्षक प्रतिनिधियों को शामिल कर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए।
चेतावनी
यदि शासन द्वारा बिना किसी जांच के ,बिना सत्यापन के किसी भी शिक्षक के वेतन काटा जाता है तो प्रदेश के समस्त शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो फेडरेशन को मजबूरन प्रदेश के सभी जिलों में धरना, प्रदर्शन एवं सामूहिक अवकाश जैसे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी।
शिक्षा का डिजिटलीकरण होना चाहिए, लेकिन शिक्षक के पेट पर लात मारकर नहीं।
*फेडरेशन के रविंद्र राठौर कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी कुर्रे कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बसन्त कौशिक कौशल अवस्थी, श्री वीरेन्द्र यादव प्रदेश सह मीडिया प्रभारी ने सँयुक्त रूप से इस आदेश को तानाशाही, अव्यवहारिक ,शिक्षकों को मानिसक रूप से तनावग्रस्त करने वाला बताते हुए विरोध किया है।
छत्तीसगढ़ सहायक एवं समग्र शिक्षक फेडरेशन
