किरंदुल पालिका का अस्थायी दखल शुल्क टेंडर फिर हुआ विवादित -पालिका प्रशासन पर उठे सवालिया निशान।

( वर्ष 24 -25 में सिर्फ 6 महीने के लिए करीबन 4 लाख 80 हजार में लगी थी अंतिम बोली ) 

( वितीय वर्ष 25 -26 में साल भर के लिए 3 लाख 35 हजार की बोली )

( निविदाकर्ता रिंग बना कर लगा रहे पालिका को लाखों का चूना )

( पालिका प्रशासन की मंशा चहेतों को लाभ पहुंचाने की ) 

किरंदुल — छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे अमीर नगर पालिका में सुमार किरंदुल नगर पालिका फिर एक बार वितीय वर्ष 25 -26 के लिए विगत दिनों हुए अस्थायी दखल शुल्क की वार्षिक निविदा को लेकर समाचार पत्रों की हेड लाइन की सुर्खियों में बनी हुई है । उल्लेखनीय हैं कि पिछले वितीय वर्ष 24 -25 में सिर्फ छह महीने के लिए निविदाकर्ता ने करीबन 4 लाख 80 हजार रुपए के आस पास की निविदा भरकर अस्थायी दखल शुल्क का टेंडर लिया था ।परंतु विचारणीय प्रश्न यह है कि पिछले वितीय वर्ष में भी करीबन 5 से 7 निविदाकर्ताओं ने निविदा फॉर्म जमा किया था ।और इस वितीय वर्ष 25 -26 के लिए भी अस्थायी दखल शुल्क के टेंडर प्रक्रिया के लिए भी छह से सात निविदाकर्ताओं ने निविदा फॉर्म खरीद कर ईएमडी के साथ जमा किये थे ।परंतु उसके बाबजूद भी पूरे वितीय वर्ष की निविदा का अधिकतम मूल्य सिर्फ 3 लाख 35 हजार ही रहा ।जबकि पालिका प्रशासन का पूरे वितीय वर्ष का मूल्य 3 लाख 30 हजार निर्धारित किया गया था ।तो ऐसा क्या हुआ कि प्रशासन के निर्धारित मूल्य से छह छह निविदाकर्ताओं के भाग लेने के बाबजूद भी शासन को सिर्फ एक वितीय वर्ष में 5 हजार रुपए का ही मुनाफा मिलेंगे । चर्चा के अनुसार कहीं निविदाकर्ताओं के द्वारा रिंग बनाकर पालिका प्रशासन को चुना लगाने की मंशा हैं या फिर किरंदुल पालिका प्रशासन की अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा ।