प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय स्थानीय सेवाकेंद्र उपकार भवन में नगर से पधारे राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई जी।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – सभा को सम्बोधित करते हुए कहा क्षणिक क्रोध या आवेश मनुष्य को कभी ना सुधरने वाली भूल कर बैठता है क्रोध से मनुष्य का विवेक नष्ट होते हैं क्रोध मुर्खता से शुरू होता है और अनेक वर्षों बाद पश्चाताप में समाप्त होता है क्रोध के कारण मनोबल आत्मबल समाप्त हो जाता है क्रोध ही अपराधों का मूल कारण बनता है मन मे चलने वाली नकारात्मकता विचार शंका कुशंका ईर्ष्या  नफरत अभियान के क्रोध की उत्पत्ति होती है ,क्रोध से दिमाग गरम हो जाता है जिससे विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ उतरते ही जिससे मानसिक और शारीरिक बिमारीया जन्म लेती है , भाई जी स्वस्थ और सुखी  जीवन के लिए क्रोध मुक्त विषय पर चर्चा कर रहे थे , सकारात्मक चिंतन से ही क्रोध पर विजय प्राप्त कि जा सकती है सहनशीलता आतीं हैं और समस्या का समाधान हो जाता है, और आध्यात्मिक ज्ञान को सकारात्मक विचारों का श्रोत बताया , आध्यात्मिकता की परिभाषा में कहा स्वयं को यथार्थ जानना पिता परमात्मा को यथार्थ जानना जीवन के असली उद्देश्य और कर्तव्य को जानना ही आध्यात्मिकता है मुख्य अतिथि पूर्व नगरपालिका अध्यक्षता अनिता जी रावके ने अपने उद्बोधन में कहा वर्तमान में मनुष्य का लक्ष्य निर्धारित नहीं होता इसलिए तनाव में रहता है उन्होंने कहा मन के अच्छे बुरे विचारों का प्रभाव स्वयं पर दुसरौ और पेड़ पौधों पर भी पड़ता है जिससे अच्छे बुरे सकारात्मक प्रभाव दिखाई देती है जिससे हम रोगमुक्त दीर्घायु शांत सकारात्मक बनने में मदद मिलती है , सेवाकेंद्र संचालिका ब्रम्हा कुमारी प्रीती दीदीने राजयोग की विधि बताते हुए कहा स्वयं को आत्मा निश्चय कर  सुर्य चांद तारागण से पार रहने वाले ज्योति स्वरूप पिता परमात्मा को मन बुद्धि ।