70 साल तक जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करने वाले अब उसी का विरोध कर रहें।
प्रमोद दुबे
महासमुंद – भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग मोर्चा राकेश चंद्राकर ने कांग्रेस के इंडी दफ्तर के घेराव को निरर्थक करार देते हुए कहा कि कांग्रेस के कदम से प्रतीत होता है कि वह भ्रष्टाचार का महिमामंडन कर रही है और जांच एजेंसियों के अस्तित्व पर सवाल उठा रही है। ईडी, सीबीआई और इनकम टेक्स जैसी संस्थाओं का गठन भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ही किया गया है और उन्हे यह शक्तियां कांग्रेस शासन में ही मिली थी। जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं और उन पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है। श्री चंद्राकर ने कहा कि भ्रष्टाचार की निंदा और समाज को इस बारे में जागरूक करने की जरूरत है, न को जांच एजेंसियों का मनोबल तोड़ने अथवा भ्रष्टाचार का महिमामंडन की।कांग्रेस बेहतर जानती है कि उसके द्वारा 70 साल तक जांच एजेंसियों का किस तरह दुरूपयोग किया गया। लेकिन भाजपा की मंशा और नीति साफ है। पारदर्शिता के लिए कोई समझौता नहीं। उन्होंने कहा कि जनता बार-बार भाजपा को मीके दे रही है और यह स्वच्छ और पारदर्शी शासन से संभव है। कांग्रेस को सोच बदलने की जरूरत है। आज ईडी दफ्तर का घेराव कर अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने की कोशिश कांग्रेस कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष श्री चंद्राकर ने कहा कि जांच एजेंसियों का इस तरह का राजनैतिक घेराव बताता है कि कांग्रेस पारदर्शिता को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। क्योंकि कल तक ईडी जैसी जांच एजेंसियों के गठन का क्रेडिट लेनें वाली कांग्रेस हो, अब इन जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। आज ईडी भ्रष्टाचार के जितने मामलों की जांच कर रही है, उसमें सिर्फ कुछ प्रतिशत राजनेता है, बाकी के अधिकतर मामले अफ सरों और अपराधियों के खिलाफ हैं। अब तक काग्रेस पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के सरकारी 1 रुपए के 15 पैसे में बदलने के सिद्धांत मानकर चलते रहे। यही वजह है कि अधिकांश भ्रष्टाचार के मामले उनके नेताओं द्वारा ही अंजाम दिए गए हैं। श्री चंद्राकर ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार निवारण में ईडी की भूमिका इन आंकड़ों से ही स्पष्ट होती है कि 2014 से पहले ईडी ने मनमोहन सरकार में केवल 34 लाख रुपए कैश जब्त किए थे, जबकि एनडीए की सरकार में उसने 2,200 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश जब्त किए हैं। मोदी सरकार से पहले इस संस्था ने केवल 5,000 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी। पिछले 10 सालों में यह राशि एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है। एनडीए सरकार ने 2014 में सरकार बनने के तुरंत बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कई स्तर पर कड़े कदम उठाए। लेकिन कांग्रेस और उनके सहयोगी इंडी गठबंधन को यह सब हजम नहीं हो रहा। जिन्होंने देश को लूटने का काम किया है उन सभी पर ही ईडी की तलवार लटकी है। यही वजह है कि वे नेगेटिव नैरेटिव फैलाकर देश की सभी जांच एजेंसियों की छवि खराब करए जांच प्रभावित करना चाहती हैं।
