बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी।
सुरेन्द्र मिनोचा
मनेंद्रगढ़/एमसीबी – भाई बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व जिले में धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके दीर्घायु जीवन की कामना की। भाइयों ने बहनों को आजीवन उनकी रक्षा करने का वचन दिया।
सोमवार को भाई बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे देश मे हर्ष उल्लास और परंपरा पूर्वक मनाया गया। हर वर्ष की तरह सावन पूर्णिमा की तिथि पर बहनों ने रक्षा सूत्र से भाइयों की कलाइयां सजाई ।रेशम की डोरी के धागे भले ही कच्चे हो लेकिन इसके पीछे का स्नेह अटूट और बेहद मजबूत होता है। बहन-भाई के प्यार का प्रतीक इस त्योहार को लेकर घर-घर में व्यापक तैयारियां की गई थी। सोमवार की सुबह लोगों ने स्नान कर देवी देवताओं की पूजा अर्चना की। हालांकि इस वर्ष रक्षाबंधन के पर्व पर भद्रा नक्षत्र का साया रहा जो लगभग 1.30 बजे समाप्त हुआ। इसके बाद बहनों ने भाइयों की कलाई में रक्षा सुत बांधकर जन्म जन्म तक सुख-दु:ख में साथ निभाने का वचन भाईयों से लिया। भाईयों ने भी बहनों को उपहार देकर हमेशा साथ निभाने का वादा किया। इस दौरान शाम तक राखी बांधने और मुंह मीठा कराने का दौर भी जारी रहा।

पर्व के मौके पर घर के बुढे- बुजुर्गों का पैर छुकर आशिर्वाद लिया गया। दोपहर में अधिकांश बहनों ने भाई की कलाई पर राखी सजाई और उपहार पाकर अपनों के साथ खुशियां मनाई। सुबह से ही तैयारी कर रही बहनों ने भाइयों के हाथों में राखियां बांधी। भारतीय हिंदू संस्कृति में सभी रिश्तो को महत्व देने के लिए कई पर्व मनाए जाते हैं ।भाई दूज के साथ रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के अनूठे संबंध को और गहरा करने का पर्व है। भारत में रक्षाबंधन को लेकर पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरा रही है। कहा जाता है की असुर देवता संग्राम में इंद्र को उनकी पत्नी इंद्राणी ने अभिमंत्रित रेशम का धागा बांधा था, जिसकी शक्ति से वे विजयी हुए। भगवान श्री कृष्ण को द्रौपदी द्वारा उनके घायल उंगली में साड़ी की पट्टी बांधने को भी रक्षाबंधन से जोड़कर देखा जाता है।
