ग्राम पंचायत बेलसोंडा मे राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की मौजूदगी मे सरपंच भामिनी ने धारा 56 का प्रयोग किया।

अतिक्रमण हटवाई अब स्वर्ण जयंती स्मारक की जांच होगी।

ग्रामीणों की शिकायत से अतिक्रमण मामले शून्य ही सकते है।

प्रमोद दुबे 

बेलसोंडा – ग्राम पंचायत बेलसोंडा मे बिषहत बलराम अतिक्रमण मामले मे आज धारा 56 का सदुपयोग करने के साथ साथ मामले का भी पटाक्षेप हो गया। विदित है कि गांव के शासकीय भूमि खसरा नंबर 376 रकबा 0.29 हेक्टेयर मे बिषहत चन्द्राकर, बलराम चन्द्राकर एवं उनके भाई पोखन चन्द्राकर ने संयुक्त रूप से आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 03 पुराना पंचायत भवन के ठीक सामने बाजार स्थल पर अतिक्रमण करके अवैध निर्माण कर रहे थे जिसे सरपंच श्रीमती भामिनी पोखन चन्द्राकर ने पहले मौखिक समझाइस दी, तत्पश्चात प्रथम , द्वितीय और तृतीय नोटिस के बाद पंचायतीराज अधिनियम की धारा 56 मे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तहसीलदार  श्रीधर पंडा, नायब तहसीलदार  मोहित कुमार अमिला तथा पुलिस विभाग की उपस्थिति मे अतिक्रमण हटवाई।

सरपंच भामिनी ने इस कार्यवाई के बाद प्रेस विज्ञप्ति मे बताई कि यदि राजस्व विभाग मे श्रीधर पंडा तथा  मोहित कुमार अमिला जैसे अधिकारी हो जाये तो सरपंचों का हौसला बढ़ जाएगा तथा अतिक्रमणकारियों को सबक भी मिलेगी। सरपंच श्रीमती चन्द्राकर ने इस पुण्य कार्य मे नवनियुक्त जिलाधीश श्री विनय कुमार लंगहे का विशेष सहयोग तथा मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया क्योकि इसके पहले भी अतिक्रमण के संबंध मे पूर्व में भी कई शिकायत पंचायत ने उच्च कार्यालय मे किया था लेकिन कांग्रेस सरकार मे पूर्व विधायक विनोद चन्द्राकर के हस्तक्षेप तथा पूर्व सरपंच राजेन्द्र चन्द्राकर का अतिक्रमण कारियों से मिलीभगत के कारण कोई कार्यवाई नही होती थी। पूर्व विधायक विनोद चन्द्राकर ने पूर्व सरपंच की बाते मानकर गांव के विकास को बाधित किया था इसीलिए उनको टिकट नही मिला और अब पूर्व सरपंच की कारगुजारी को भी गांव की जनता जनार्दन समझ चुकी है जिसका जवाब जनता ब्याज के साथ देने के लिए आतुर है। सरपंच श्रीमती चन्द्राकर ने बताया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल मे सभी तरफ गुंडागर्दी और अतिक्रमणकारियों का हौसला बुलंद रहता था जिसका खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है लेकिन हमारी भाजपा सरकार आने के बाद तथा विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा के असीम सहयोग से अब हमारी पंचायत को काफी विकास हो रहा है। ग्रामीणों ने अतिक्रमण स्थल पर तहसीलदार को शिकायत किया कि अतिक्रमण स्थल पर पूर्व मे स्वर्ण जयंती स्मारक बना हुआ था जिसे तोड़कर पूर्व सरपंच राजेन्द्र चन्द्राकर के इशारे पर अतिक्रमण करवाया गया है। इस मामले मे सरपंच भामिनी ने बताया कि स्वर्ण जयंती स्मारक बना हुआ था जिसकी फोटो भी है लेकिन स्वर्ण जयंती स्मारक टूटने के बावजूद पूर्व सरपंच द्वारा अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की कार्यवाई नही करना समझ से परे है, जो भी हो इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होगी जिसमे पूर्व सरपंच राजेन्द्र चन्द्राकर या अतिक्रमणकारियों मे से किसी एक पक्ष का फंसना लगभग तय है। श्रीमती चन्द्राकर ने यह भी बताया कि जिन अतिक्रमणकारियों का अवैध निर्माण टूटा है वे संगठित होकर उनके विरुद्ध अन्य अतिक्रमणकारी को संरक्षण देने का फर्जी शिकायत भी विधायक तथा उच्च कार्यालय में कर सकते है लेकिन मेरी विनती है कम्पीटेंट ऑथिरिटी जरूर उनके आवेदन को संज्ञान मे लेकर कार्यवाई करे ताकि अतिक्रमण मामले मे सभी नागरिक जागरूक हो तथा यह तभी संभव है जब सभी एकदूसरे के विरुद्ध अतिक्रमण की शिकायत करे जिससे पंचायत को अतिक्रमण मामले मे कार्य करने मे सहयोग मिलेगा लेकिन अफसोस की बात यह है कि आज तक मेरी पंचायत मे किसी ने भी अतिक्रमण मामले में लिखित शिकायत नही किया। सरपंच ने सभी ग्रामीणों से निवेदन भी किया है कि आज से जब भी जहाँ भी कोई अतिक्रमण होता है तो तुरंत लिखित मे पंचायत मे शिकायत करे।