प्रमोद दुबे
महासमुंद। राजा मोरध्वज की नगरी आरंग की पंचमुखी महादेव के बारे में जो 27 फीट की मोटाई वाले पीपल वृक्ष के गर्भ से निकले हैं। मंदिरों की नगरी के नाम से विख्यात नगर है।आरंग जहां जगह-जगह मंदिर देवालय हैं।नगर के चारों दिशाओं में अनेक प्राचीन शिव लिंगो का दर्शन होता है। किवदती के अनुसार पहले यहां 107 शिवलिंग होने की चर्चा यहां हर लोगों की जुबान से सुनने को मिलती है। वही नगर के उत्तर दिशा में खरोरा मार्ग पर स्थित है। पंचमुखी महादेव जहां भगवान शिव की पांच प्राचीन विशाल स्वयंभू शिवलिंग विद्यमान है। एक ही स्थान मे पर पांच शिवलिंग होने के कारण यह स्थान पंचमुखी महादेव के नाम से जाना जाता है। हमारे प्रतिनिधि प्रमोद दुबे लोगों के प्राप्त जानकारी के अनुसार 71 साल पहले फिरंता लोधी नाम का एक शिव भक्त व किसान था। जो पंचमुखी महादेव स्थल पर पूर्व से स्थापित कर शिवलिंगों की पूजा अर्चना करता था। और वहीं पर स्थित एक विशाल पीपल में प्रतिदिन जल चढ़ाता था। तभी पीपल बीच के गर्भ में स्थित भगवान शिव ने भक्त फिरंता लोधी को बाहर निकालने के लिए बार-बार स्वप्न देने लगा। उन्होंने लोगों को इसी जानकारी दी किसी ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। बल्कि उन्हें बुरा भला वह अप शब्द कहने लगे। उन्होंने इस बात की जानकारी अपने गुरु गोपाल दास को दिया। तो उसने बागेश्वर को पूर्व मुखी होने की बात कहते हुए।पीपल के पूर्व दिशा को खोलने का सुझाव दिया उनके आज्ञा अनुसार फिरंता ने विशाल पीपल विषय के पूर्व दिशा की खुदाई शुरू कर दिया जहां 11 नवंबर सन 1952 को भगवान स्वयंभू प्रकट हो गए।तब से यह स्थान पंचमुखी महादेव के नाम से विख्यात है।

27 फीट मोटी विशाल पीपल वृक्ष के गर्भ से प्रगति शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। इतना विशाल पीपल वृक्ष और उनके गर्भ से प्रगट शिवलिंग कहीं और देखने सुनने को नहीं मिलता इस कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है ।भगवान शिव के साथ-साथ पीपल का वृक्ष भी लोगों के लिए कौतूहल का आकर्षण का केंद्र है ।मंदिर परिसर में विशाल प्राचीन बावली है ।जिसमें वर्ष भर जल भरा रहता है ।जल सदैव ठंडा रहता है। स्थानीय लोगो ने हमारे प्रतिनिधि प्रमोद दुबे को बताया कि फिरंता लोधी ही यहां पीपल से भगवान शिव के प्रकट होने के पश्चात जल अर्पण हेतु यहां कुआं खोदने लगे तभी खुदाई के दरमियान 40 फीट गहरी विशाल बावली निकल गई ।जिसमें नीचे तक सीधी सीढी बना हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालु जल् से शुद्ध होकर भगवान शिव का दर्शन करते हैं। मंदिर के संचालक और पुजारी शत्रुघ्न लोधी ने बताया कि पांचो शिवलिंग काले पत्थरों से निर्मित है। पीपल के नीचे स्थित शिवलिंग के ऊपरी भाग गोलाकार व नीचे का भाग अष्टकोणी है ।सभी शिव लिंगो का आकार विशाल है ।परिसर में ही तीन शिवलिंग एक जगह पर स्थापित था ।जहां वर्तमान में जन सहयोग से मंदिर का निर्माण किया गया है। सावन के पवित्र महीने में देश प्रदेश के सभी सी वालों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है ।वही राजा मोरध्वज की नगरी आरंग में शिव पंचमुखी महादेव मंदिर में भारी भी उमड़ती है।
