बारनवापारा – महासमुन्द जिला से लगे हुए छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बारनवापारा परियोजना मंडल अंतर्गत रवान रेंज आसपास के क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब समीप के ग्राम गजराडीह,रवान,और मुरुमडीह,के अलग-अलग जगह वन कक्ष जंगल में तेंदूपत्ता संग्रहण कर रहे तीन व्यक्तियों पर वन्यप्राणी गौर ने हमला कर दिया। बताया जा रहा है गौर का हमला इतना आक्रामक और जानलेवा था की गजराडीह के देवेंद्र साहू पिता श्री स्व-पांडव साहू जाति कोलता उम्र 51 वर्ष को कक्ष क्रं.117 में तेंदूपत्ता तोड़ने के दौरान गौर के अचानक हुए हमले से गंभीर रूप से घायल हो गया था जिसकी कुछ समय में ही मौत हो गई जैसे ही घटना की जानकारी मिली विभाग द्वारा 5000 रुपए तत्काल सहायता राशि प्रदान की गई।एवं रवान निवासी गायत्री यादव पति मंगतू यादव जाति यादव उम्र 60 वर्ष को वन कक्ष क्रं.118 में गौर ने हमला कर दिया जिसे घायल अवस्था में उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव पहुंचाया गया तथा वन विकास निगम विभाग के द्वारा सहायता राशि के रुप में 1000 दिया गया वहीं मुरुमडीह निवासी पंचबाई ठाकुर पति स्व.दुलार सिंह जाति गोंड़ उम्र 37 वर्ष को वन कक्ष क्रं.121 में गवर्नेसिंग से हमला कर दिया जिनकी उपचार भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है उसे भी 1000 रुपए तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई…
वही एक ही दिन में अलग-अलग वन कक्ष में एका एक तीन व्यक्तियों पर हुए वन्यप्राणी गौर के हमले से एक व्यक्ति की मौत और दो गंभीर रूप से हुए घायल व्यक्तियों के इस प्रकरण से क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है बरनवापारा अभ्यारण में विभिन्न प्रकार के हिंसक वन्य प्राणियों का संख्या लगातार बढ़ रहा है वही वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के बार नवापारा अभ्यारण के जंगलों में बीते कुछ वर्षों से लगातार बाघ की मौजुदगी व क्षेत्र के वनों में अलग-अलग जगह उनकी चहल कदमी की खबरें भी आती रही है जिससे क्षेत्र के लोग डरे सहमें रहते हैं
वहीं क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों वनवासीयों के जीवन यापन का मुख्य आधार तेंदूपत्ता चार, महुआ,तेन्दू,गोंद,एवं अन्य वनोपज संग्रहण करना भी है इसलिए ऐसे वन्य प्राणियों के हमले के खतरे के बीच लोगों को काफी चुनौतियां का भी सामना पड़ता है लेकिन अब तक विचरण कर रहे बाघ के हमले से किसी ग्रामीण के प्रभावित होने का कोई मामला सामने नहीं आया है… लेकिन इस घटना से क्षेत्रवासी दहशत और डर के साए में जरूर है लेकिन करें तो क्या करें जंगल ही उनका जीवन है और जंगल ही उनका दुनिया है…..
