पूर्व विधायक अग्नि चंद्राकर पंचतत्व में विलीन, नम आंखों से दी विदाई ।

पूर्व सीएम भूपेश, ताम्रध्वज साहू समेत पक्ष- विपक्ष के दिग्गज नेता हुए शामिल।

अंतिम दर्शन के लिए घर और कांग्रेस भवन रखा गया पार्थिव शव।

प्रमोद दुबे 
महासमुंद – कैबिनेट मंत्री दर्जा के साथ छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष रहे तथा महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अग्नि चंद्राकर का रविवार शाम रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन के समाचार से क्षेत्र में शोक की लहर है। सोमवार सुबह 10 बजे उनका पार्थिव शरीर स्टेशन रोड स्थित उनके निज निवास लाया गया बाद कांग्रेस भवन में आमजनों के दर्शनार्थ रखा गया। ज्ञात हो कि करीब 40 साल तक राजनीति में सक्रिय रहे अग्नि चंद्राकर अपने सरल, सहज स्वभाव, साफ सुथरी राजनीति और सेवा भावना के कारण पक्ष-विपक्ष में समान रूप से लोकप्रिय रहे। महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से तीन तीन बार विधायक चुना जाना उनकी जन-स्वीकार्यता और लोकप्रियता का प्रमाण है। विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम सोरिद में दाऊ रमनलाल चंद्राकर के घर 1 जनवरी 1954 को जन्मे बी. कॉम., एल.एल.बी. उच्च शिक्षित अग्नि चंद्राकर ने व्यवसाय के रूप में कृषि को ही अपनाया। उनके राजनीतिक सफर की शुरूआत सन् 1986 में हुई जब वे ग्राम पंचायत धनसुली के निर्विरोध सरपंच बने। सन् 1993 में महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से प्रथम बार निर्वाचित हुए। बाद सन् 1998 में पुनः विधायक बने। सन् 2000 से 2003 तक भूमि विकास बैंक अध्यक्ष रहे। सन् 2008 में तृतीय बार महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। सन् 2021 में अध्यक्ष, छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रायपुर मनोनीत किए गए। साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री की दर्जा दिया गया था। विधायक के रूप में अग्नि चंद्राकर ने महासमुंद क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए पूरी तरह समर्पित रहे। पासिद जलाशय, निसदा डायवर्सन सहित क्षेत्र की अधिकतर सिंचाई परियोजनाएं उनके प्रयासों से साकार हुई हैं। जिला बनाने दिया इस्तीफा, अपने ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे महासमुंद जिला निर्माण में उनका बड़ा योगदान रहा। यहां की जनता महासमुंद जिला की मांग कर रही थी, लेकिन 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश में नए जिलों की घोषणा हुई तो उसमें महासमुंद का नाम नहीं था। रायपुर को विभाजित कर धमतरी को जिला बनाया गया, लेकिन महासमुंद की मांग अनसुनी कर दी गई। जन- आकांक्षा की अनदेखी से क्षुब्ध श्री चंद्राकर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को अपने विधायक पद से इस्तीफा भेजकर अपनी ही सरकार के खिलाफ अनवरत धरना में बैठ गए। सरकार को झुकना पड़ा और अंततः महासमुंद जिला निर्माण की घोषणा की गई। महासमुंद जिला निर्माण के बाद सन् 1998 से 2006 तक वे कांग्रेस के प्रथम महासमुंद जिलाध्यक्ष भी रहे। कृषि उनका व्यवसाय था और बीज निगम अध्यक्ष के रूप में उन्होंने प्रदेशभर के किसानों के हित में कई कार्य किए। उनका निधन महासमुंद विधानसभा ही नहीं, सम्पूर्ण महासमुंद जिला और पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।

अंतिम दर्शन के लिए पूर्व सीएम भूपेश समेत ये रहे मौजूद

सुबह रायपुर से श्री चंद्राकर का पार्थिव शरीर महासमुंद उनके निज निवास पहुंचा, पश्चात आम जनता के दर्शन के लिए कांग्रेस भवन में लाया गया जहाँ बिन्द्रानवागढ़ विधायक, महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर, नपाध्यक्ष राशि महिलांग, त्रिभुवन महिलांग, उषा पटेल, आलोक चंद्राकर, दाऊलाल चंद्राकर, मनोजकांत साहू सहित अनेक कांग्रेस संगठन के पदाधिकारियों सहित कार्यकताओं के साथ भाजपा नेताओं ने श्री चंद्राकर को श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस भवन से शव यात्रा उनके गृह ग्राम लभराकला रवाना हुई। जहाँ उन्हे श्रद्धांजलि देने पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, विधायक चातुरी नंद, पूनम चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शहर व क्षेत्र वासी उपस्थति हुए और नम आँखों से उन्हें विदाई दी। अग्नि की अंतिम यात्रा में