सुरेन्द्र मिनोचा
मनेन्द्रगढ़/एमसीबी – प्राकृतिक चिकित्सा एवं अपने दैनिक दिनचर्या में योग एवं प्राणायाम के माध्यम से विभिन्न कठिन बीमारियों से मुक्त होने वाली समाजिक कार्यकर्ता एवं योग साधिका रुपा पोद्दार उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने कठिनाई के दिनों में योग और प्राणायाम पर विश्वास कायम रखा।रुपा ने लगभग 10 वर्षों तक दुर्ग में रहकर प्राकृतिक चिकित्सा, योग एवं प्राणायाम की लंबी साधना की है।योग पर अटूट विश्वास के कारण ही रुपा ने पतंजलि योगपीठ हरिद्वार की चिकित्सा को करीब से समझने भारत के विभिन्न योगाचार्य से भी मुलाकात की।पति का स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी रूपा ने अपने दैनिक दिनचर्या में योग एवं प्राणायाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। दसवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक थीम-” महिला सशक्तिकरण के लिए योग पर विचार व्यक्त करते हुए रूपा कहती हैं कि योग अभ्यास से महिलाएं निसंदेह स्वस्थ एवं सशक्त हो सकती हैं।महिलाओं की संस्था तेजस्विनी शाखा की सक्रिय सदस्य एवं लायनेस , वी क्लब की सह सचिव रूपा पोद्दार ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के परिपेक्ष में महिलाओं को स्वस्थ निरोग आनंदमय,शांतिपूर्ण एवं गतिशील जीवन बनाए रखने के लिए योग एवं प्राणायाम को अपने दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की अपील की है। रूपा का कहना है कि महिलाओं की ऐसी बहुत सी बीमारियां होती है, जिन्हें योगासनों के माध्यम से दूर किया जा सकता है। कामकाजी महिलाएं घर और ऑफिस के कामों के चलते लगातार व्यस्त रहती हैं, लेकिन उन्हें भी अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए योग के लिए समय जरुर निकालना चाहिए, इसका उनकी हेल्थ और लाइफ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी रूपा पोद्दार ने महिलाओं से अपील की है कि अपनी दिनचर्या में योग को शामिल कर अपने तन मन को स्वस्थ रख सकते हैं, प्राणायाम से हमें दिन भर सकारात्मक ऊर्जा मिलती है एवं शरीर की गतिशीलता भी बढ़ती है। तेजस्विनी शाखा,लायनेस क्लब एवं गोल्डन संजीवनी के माध्यम से विभिन्न महिलाओं से संपर्क में रहने वाली रूपा पोद्दार ने योग एवं प्राणायाम को स्वयं आत्मसात किया और अब अस्वस्थ महिलाओं को योग करने के प्रेरित करने का विशिष्ट कार्य कर रही हैं।
योग प्राणायाम एवं प्राकृतिक चिकित्सा से रूपा को मिला नया जीवनदान।
