गर्मी में भूजलस्तर गिरने से 268 हैंडपंपों के हलक सूखे, लक्ष्य से आधे गांवों में टंकी तो बन गई पर नलों में पानी की सप्लाई नहीं ।
प्रमोद दुबे
महासमुंद :- पीएचई विभाग के अफसरों को उदासीनता और ठेकेदारों की मनमानी का खमियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। एक ओर जलजीवन मिशन के अधूरे कार्य की वजह से गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है तो दूसरी ओर गर्मी के चलते गांवों में गिरते भूजलस्तर के चलते हैंडपंप सुख चुके है जिससे ग्रामीणों को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। पीएचई विभाग स्वच्छ पानी तो दूर जिले के कई गांवों में जरूरत के पानी की आपूर्ति भी नहीं करा पा रहा है।ज्ञात हो कि इन दिनों भीषण गर्मी में भू- जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। शहरों में जहाँ नगर पालिका और नगर पंचायत आम जनता को पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति करा रही है पर ग्रामीण क्षेत्रों इन दिनों पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए हर रोज-जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इधर, संबंधित विभाग भी ग्रामीणों को जलापूर्ति कराने में असहाय नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में 9 हजार 754 हैंडपंप हैं इनमें 9 हजार 404 चालू हैंडपंप की संख्या में कमी। जानकारी के अनुसार 2022 में जिले में 11 हजार हैंडपंप थे, जो अब घटकर 9 हजार 754 रह गई है जिसमें से 350 बंद हैं। इनमें से भीषण गर्मी के चलते भू जल स्तर नीचे जाने से 268 हैंडपंपों के हलक सूख गए हैं।विभाग द्वारा जल जीवन मिशन का कार्य बेहद पीछे चल रहा है। अभी तक लक्ष्य आधे गांव में पानी की टंकी तो बन गयी पर नलों में पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है जहाँ और 350 बंद हैं। इनमें 268 हैंडपंप जलस्तर नीचे जाने के कारण बंद हो गए हैं। जिन हैंडपंपों में तकनीकी खराबी है उसे सुधारे जाने की बात विभाग तो कर रहा है और ऐसे 82 हैंडपंपों की सूची भी बनाई गई है। इधर, रहा है।
जीवतरा में एक नल पर आश्रित 200 परिवार
ग्राम पंचायत परसदा (ख) के आश्रित ग्राम जीवजरा में लगभग 200 परिवार निवास करते हैं। यहाँ पेयजल व निस्तारी के लिए दो बोर है। जिसमें से एक महीनों से खराब है। हैण्ड पंप नहीं है। नल जल योजना के तहत गांव में एक भी पानी की टंकी नहीं है। जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2022 में लगभग 74 लाख की लागत से एक पानी टंकी बनाई गयीं है और लोगों के घरों में नल के कनेक्शन लगाए गए. पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लापरवाही व ठेकेदार की मनमानी के कारण 9 माह में काम पूर्ण कर लेने के कार्य आदेश के बाद भी 2024 तक पूर्ण नहीं होपाया और घरों में नल शो पीस बनकर रह गया है। एक बोर ही संचालित है उससे एक सार्वजनिक नल लगा है, जिसमें पानी की धारा कम है कि ग्रामीणों को एक बाल्टी पानी लेने में लगभग 15 से 20 मिनट लग जाते है। ग्रामीण निस्तारी के लिए एक किलोमीटर दूर तालाब का गंदा पानी निस्सारी के लिए इस्तेमाल तो कर लेते हैं, पर पीने के पानी के लिए उन्हे जद्दोजहद करनी पड़ती है।
बोरिद के ग्रामीण पी रहे झरिया का पानी
जिले के पुरातात्विक क्षेत्र सिरपुर के समीपस्थ ग्राम चुहरी के आश्रित ग्राम बोरिय के ग्रामीण झरिया का पानी पीने मजबूर है। यहां जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण तो हुई है लेकिन, बौर खनन ही नहीं होने से यहां के लोगों को भीषण गर्मी में जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। यहां पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा भी गांव में पीने व निस्तारी के लिए 5 बोर कराए गए हैं। लेकिन, भीषण गर्मी और गिरते भू-जल स्तर के चलते इन बौर पंपों में भी पानी आना बंद हो गया। बौरिद के वार्ड 7 स्थित लगभग 40 परिवार के लोगों को पीने व निस्तारी के लिए नाले का झरिया पानी ही एकमात्र सहारा है। बोरिद के संतराम, नारायण बाई देवदास, मुजरा प्रसाद ध्रुव सहित पंचों ने बताया कि झरिया का पानी पीने की जानकारी स्थानीय एवं जिला प्रशासन सहित पीएचई विभाग के अफसरों को है। पखवाड़े भर पहले पहुंचे अफसलों ने जल्द से जल्द बौर खनन का आश्वासन भी दिया। लेकिन, आज भी समस्या जस की तस है।
