प्रमोद दुबे
महासमुंद :- लोकसभा चुनाव के लिए दोनों प्रमुख दल भाजपा-कांग्रेस अपने पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए जुटे हैं। दोनों ही दलों के प्रत्याशी धुंआधार जनसम्पर्क कर रहे हैं। भाजपा प्रवेश करने वाले कांग्रेस नेताओं के कारण उत्साहित है, पर पार्टी छोड़कर भाजपा प्रवेश कर रहे नेताओं को देखकर भी कांग्रेस चिंतित दिखाई नहीं दे रही, बल्कि वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ प्रचार में जुटी है। इस बार का लोकसभा चुनाव अन्य चुनावों की तरह ही है। दल-बदल हमेशा की तरह चल रहे हैं। दोनों ही दलों के कार्यकर्ता अपने नेताओं से संतुष्ट नहीं है, लिहाजा दल-बदल का खेल तेजी से चल रहा है। दो-चार लोगों के साथ मिलकर पार्टी बदलने वाले नेता सैकड़ों समर्थकों की लिस्ट जारी कर बता रहे हैं कि उनके साथ सैकड़ों लोगों ने पार्टी बदली है। बहरहाल, देश के सबसे बड़े चुनाव में महासमुंद लोकसभा हमेशा ही हाई प्रोफाइल सीट रही है। इस बार भी प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू व भाजपा सरकार की पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी आमने-सामने चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस अभी 100 दिन पहले तक प्रदेश की सत्ता में थी और भाजपा अभी प्रदेश के साथ केंद्र की सत्ता में भी काबिज है। भाजपा पूर्व में भी लगातार 15 वर्षों तक डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सरकार चला चुकी है। इतने लंबे समय तक प्रदेश में सरकार चलाने व वर्तमान में आदिवासी मुख्यमंत्री नियुक्त करने के बावजूद यह चुनाव प्रदेश स्तर के नेताओं को दरकिनार कर भाजपा मोदी के चेहरे पर लड़ रही है। जबकि, कांग्रेस जातिगत समीकरण के अनुसार चुनावी मैदान में है।
जिले के विधायकों का प्रभाव घटा !
जिले में हमेशा ही भाजपा बढ़त लेती आई है, पर इस बार संपन्न विधानसभा चुनाव में जिले की चार सीटों में भाजपा महासमुंद व बसना सीट ही जीत पाई। सरायपाली व खल्लारी सीट भारी अंतर से कांग्रेस ने जीती है, पर विधानसभा चुनाव संपन्न होने के मात्र 100 दिनों में ही जिले से जीते भाजपा विधायकों से लोगों का मोह भंग होने लगा है! यह इसलिए भी कहना पड़ रहा है कि अब भाजपा विधायकों के दौरों में वह उत्साह नहीं दिखता जो चुनाव के पहले दिखाई देता था। जबकि, भाजपा अब सत्ता में है। आमतौर पर सत्ता के विधायकों के पीछे भीड़ दिखाई देती है, पर इस बार सत्ता में रहते हुए भी विधायकों का आम लोगों से दूर रहना लोकप्रियता को दशार्ता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस विधायकों के दौरों में सत्ता में नहीं होने के बावजूद पूर्व की तरह उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कांग्रेस में उत्साह के बाद भी विगत पांच वर्षों के बीच कांग्रेस प्रवेश किए नेताओं की अब भाजपा की सत्ता आते ही लोकसभा चुनावी मौके पर कांग्रेस छोड़ भाजपा में प्रवेश करने की खबरें प्रतिदिन सुर्खियां बन रही है। बावजूद कांग्रेस के उत्साहित कार्यकर्ता व नेता केंद्र और राज्य की सत्ता से दूर अपने कार्यकर्ताओं के उत्साह को कितना भुना पाएगी यह तो चुनाव परिणाम ही बता पाएगा।
भाजपा से पुराने कटे, नवप्रवेशियों पर भरोसा
भाजपा में जिस तरह रातों रात लोकप्रिय मुख्यमंत्री हो या संगठन पदाधिकारी उन्हें बदल दिया जाता है। ठीक इसी तर्ज पर भाजपा इस लोकसभा चुनाव में करती दिख रही है। पूरे लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी से लगभग अलग कर उन्हें नई जिम्मेदारी के आश्वासन के साथ कांग्रेस से आए नवप्रवेशी भाजपा कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ने से अब भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता नाराज हैं। खासकर जिले के बसना व महासमुंद विधानसभा के कार्यकर्ता नवप्रवेशियों के कारण बगावत तो नहीं कर रहे, पर वे घर मे बैठने का रास्ता ही उचित मान रहे हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि भाजपा को मोदी के चेहरे पर इतना ज्यादा भरोसा है कि वह पुराने व वरिष्ठ नेताओं की भी परवाह न करते हुए सुनियोजित चुनाव की तैयारियों में जुटी है।
